प्रस्तावना: क्या आप पेडागोजी के 'चक्रव्यूह' में फंसते हैं? नमस्कार मेरे भावी शिक्षकों! स्वागत है आपका SK SACHIN CLASSES पर। दोस्तों, पिछले ब्लॉग (Part-1) में हमने हिंदी पेडागोजी की नींव पक्की की थी। हमने जाना था कि अर्जन क्या है और अधिगम क्या है। लेकिन... CTET अब बदल चुका है। अब पेपर में सीधे-सादे सवाल नहीं आते। अब परीक्षक (Examiner) आपसे ऐसे सवाल पूछता है: "जिम कमिन्स का BICS क्या है?" "टॉप-डाउन और बॉटम-अप अप्रोच में क्या अंतर है?" "स्टीफन क्रैशन का i+1 सिद्धांत क्या कहता है?" जब ऐसे भारी-भरकम शब्द सामने आते हैं, तो अच्छे-अच्छे छात्रों के पसीने छूट जाते हैं। हमें लगता है कि यार, हिंदी तो आसान थी, ये 'रॉकेट साइंस' कहाँ से आ गई? घबराइए मत! आज का यह ब्लॉग (Part-2) उसी 'रॉकेट साइंस' को 'देसी कहानियों' में बदल देगा। आज हम हिंदी पेडागोजी की उस गहराई में उतरेंगे जहाँ से CTET Paper 2 और Paper 1 के सबसे कठिन प्रश्न बनते हैं। अगर आपने अगले 20 मिनट इस ब्लॉग को ध्यान से पढ़ लिया, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ...