⭐ UPTET संस्कृत सम्पूर्ण रामबाण नोट्स: अध्याय 9 ⭐ विषय: उपसर्ग, प्रत्यय, पर्यायवाची एवं विलोम शब्द का विस्तृत अध्ययन प्रिय भावी शिक्षकों, SK SACHIN CLASSES के इस विशेष अध्याय में आपका स्वागत है। आज का विषय संस्कृत भाषा के 'शब्द-भंडार' (Vocabulary) को बढ़ाने का सबसे वैज्ञानिक तरीका है। अक्सर छात्र संस्कृत के बड़े-बड़े शब्दों को देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन यदि आपको उपसर्ग और प्रत्यय तोड़ना आ गया, तो आप किसी भी अपरिचित शब्द का अर्थ आसानी से निकाल सकते हैं। आइए, इसे बहुत ही आसान और 'रामबाण ट्रिक्स' के साथ समझते हैं। ⭐ भाग 1: उपसर्ग प्रकरण (Prefixes in Sanskrit) उपसर्ग किसे कहते हैं? वे शब्दांश जो किसी धातु (क्रिया) या शब्द के आरंभ (पहले) जुड़कर उसके अर्थ को पूरी तरह से बदल देते हैं या उसमें एक नई विशेषता ला देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। संस्कृत सूक्ति: "उपसर्गेण धात्वर्थो बलादन्यत्र नीयते। प्रहाराहार-संहार-विहार-परिहारवत्॥" (अर्थात्: उपसर्ग के जुड़ने से धातु का अर्थ बलपूर्वक बदल जाता है। जैसे 'हृ' धातु (हरना) में अलग-अलग उपसर्ग लगने से...