व्हाट्सएप चैनल से जुड़े 👇 👇 👇 व्हाट्सएप से जुड़ने के लिए अभी क्लिक करें अध्याय 3 – बाल विकास के प्रमुख पहलू – शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावात्मक आदि ▶ शैशवावस्था (0 से 5 वर्ष या 6 वर्ष ) 1. शारीरिक विकास ✔ शरीर का तेज़ी से बढ़ना, वजन और लंबाई में वृद्धि। ✔ मांसपेशियाँ विकसित होती हैं, चलना, दौड़ना, पकड़ना सीखते हैं। ✔ रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण। ✔ पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल बहुत आवश्यक। 2. मानसिक विकास ✔ जिज्ञासा बढ़ती है – हर चीज़ को छूने, देखने की इच्छा। ✔ भाषा सीखने की शुरुआत – बोलने के शब्दों का विकास। ✔ सोचने और समझने की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती है। ✔ अनुकरण के माध्यम से सीखते हैं। 3. सामाजिक विकास ✔ परिवार के साथ लगाव – माँ-पिता की देखभाल आवश्यक। ✔ दूसरों से संपर्क की शुरुआत। ✔ भरोसा और सुरक्षा की भावना बनती है। ✔ खेल में रुचि बढ़ती है। 4. भावात्मक विकास ✔ भावनाएँ तीव्र होती हैं – रोना, हँसना, डरना। ✔ माता-पिता से प्रेम और आश्रय की आवश्यकता। ✔ भावनाओं के नियंत्रण की शुरुआत। ▶ बाल्यावस्था (6 से 12 वर्ष) 1. शारीरिक विकास ✔ शरीर में स्थिर गति से वृद्ध...