UPTET Hindi Chapter 1: हिंदी वर्णमाला (स्वर एवं व्यंजन) | 2000+ Words रामबाण नोट्स & 50 MCQ (SK SACHIN CLASSES)
⭐ अध्याय 01 : हिंदी वर्णमाला (स्वर एवं व्यंजन) - UPTET रामबाण महा-एपिसोड ⭐
SK SACHIN CLASSES स्पेशल: भावी शिक्षकों! हिं
दी व्याकरण की नींव 'वर्णमाला' पर ही टिकी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET और CTET) के दोनों स्तरों (Primary & Junior) में वर्णमाला से कम से कम 3 से 4 प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। वर्णों के उच्चारण स्थान, अल्पप्राण-महाप्राण, और अघोष-सघोष में छात्र अक्सर भ्रमित होते हैं। इस 2000+ शब्दों के विस्तृत रामबाण लेख में हम वर्णमाला का ऐसा 'पोस्टमार्टम' करेंगे कि परीक्षा में आपका एक भी प्रश्न गलत नहीं होगा।
⭐ 1. वर्ण और वर्णमाला (Varna and Varnamala) का अर्थ
- ⭐ ध्वनि (Sound): भाषा की सबसे छोटी मौखिक इकाई ध्वनि कहलाती है।
- ⭐ वर्ण (Letter): भाषा की सबसे छोटी लिखित इकाई जिसके और टुकड़े (खंड) नहीं किए जा सकते, उसे 'वर्ण' कहते हैं (जैसे- अ, क्, ख्)।
- ⭐ वर्णमाला: वर्णों के व्यवस्थित और क्रमबद्ध समूह को 'वर्णमाला' (Alphabet) कहा जाता है।
- ⭐ कुल वर्ण: हिंदी वर्णमाला में कुल 52 वर्ण होते हैं (11 स्वर + 2 अयोगवाह + 33 मूल व्यंजन + 4 संयुक्त व्यंजन + 2 द्विगुण व्यंजन = 52)।
⭐ 2. वर्णों के भेद (Types of Varna)
हिंदी वर्णमाला को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
- स्वर (Vowels) 2. व्यंजन (Consonants)
⭐ 3. स्वर (Swar / Vowels) का विस्तृत विश्लेषण
जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता के (स्वतंत्र रूप से) होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। बोलते समय हवा बिना किसी रुकावट के मुख से बाहर निकलती है।
- ⭐ हिंदी में स्वरों की कुल संख्या 11 मानी जाती है (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)।
- ⭐ 'अं' और 'अः' को 'अयोगवाह' कहा जाता है, ये न तो पूर्णतः स्वर हैं और न ही व्यंजन।
⭐ स्वरों का वर्गीकरण (Classification of Vowels):
A. मात्रा या उच्चारण काल के आधार पर (3 प्रकार):
- ⭐ ह्रस्व स्वर (Hrasva Swar): जिनके उच्चारण में सबसे कम (एक मात्रा का) समय लगता है। इन्हें मूल स्वर भी कहते हैं। इनकी संख्या 4 है: अ, इ, उ, ऋ।
- ⭐ दीर्घ स्वर (Deergha Swar): जिनके उच्चारण में ह्रस्व से दोगुना (दो मात्रा का) समय लगता है। इनकी संख्या 7 है: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
- नोट: ए, ऐ, ओ, औ को संयुक्त स्वर भी कहा जाता है क्योंकि ये दो स्वरों से मिलकर बनते हैं (अ+इ=ए, अ+उ=ओ)।
- ⭐ प्लुत स्वर (Pluta Swar): जिनके उच्चारण में ह्रस्व से तीन गुना समय लगता है। इसका प्रयोग नाटक के संवादों या किसी को पुकारने में होता है। इसका चिह्न 'ऽ' होता है। जैसे- ओऽम्, राऽऽम।
B. जीभ के प्रयोग के आधार पर (3 प्रकार):
- ⭐ अग्र स्वर: जीभ का अगला हिस्सा काम करता है (इ, ई, ए, ऐ)।
- ⭐ मध्य स्वर: जीभ का बीच का हिस्सा काम करता है (केवल 'अ')।
- ⭐ पश्च स्वर: जीभ का पिछला हिस्सा काम करता है (आ, उ, ऊ, ओ, औ)।
⭐ 4. व्यंजन (Vyanjan / Consonants) का विस्तृत विश्लेषण
जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से नहीं होता, बल्कि स्वरों की सहायता से होता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। हर व्यंजन के उच्चारण में 'अ' स्वर छिपा होता है (जैसे- क् + अ = क)।
- ⭐ हिंदी में मूल व्यंजनों की संख्या 33 है।
⭐ व्यंजनों का वर्गीकरण (Classification of Consonants):
A. स्पर्श व्यंजन (Sparsh Vyanjan):
जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय हवा कंठ, तालु, मूर्धा, दाँत या होंठों का 'स्पर्श' करके निकलती है। इनकी कुल संख्या 25 है। इन्हें 5 वर्गों में बांटा गया है (हर वर्ग में 5 वर्ण):
- ⭐ क-वर्ग (कंठ्य): क, ख, ग, घ, ङ
- ⭐ च-वर्ग (तालव्य): च, छ, ज, झ, ञ
- ⭐ ट-वर्ग (मूर्धन्य): ट, ठ, ड, ढ, ण
- ⭐ त-वर्ग (दंत्य): त, थ, द, ध, न
- ⭐ प-वर्ग (ओष्ठ्य): प, फ, ब, भ, म
B. अन्तस्थ व्यंजन (Antahstha Vyanjan):
इनका उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी भाग को पूरी तरह से स्पर्श नहीं करती। इनकी संख्या 4 है:
- ⭐ य, र, ल, व * (नोट: 'य' और 'व' को अर्द्धस्वर भी कहा जाता है। 'र' को लुंठित या प्रकंपित और 'ल' को पार्श्विक व्यंजन कहते हैं)।
C. ऊष्म / संघर्षी व्यंजन (Ushma Vyanjan):
जिनके उच्चारण में हवा मुख में रगड़ खाकर गर्मी (ऊष्मा) पैदा करती है। इनकी संख्या भी 4 है:
- ⭐ श, ष, स, ह
D. संयुक्त व्यंजन (Sanyukt Vyanjan):
जो व्यंजन दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं। इनकी संख्या 4 है (UPTET का सबसे पसंदीदा प्रश्न):
- ⭐ क्ष = क् + ष
- ⭐ त्र = त् + र
- ⭐ ज्ञ = ज् + ञ
- ⭐ श्र = श् + र
E. उत्क्षिप्त / द्विगुण व्यंजन (Utkshipt Vyanjan):
इनके उच्चारण में जीभ पहले ऊपर उठकर मूर्धा को छूती है और फिर झटके से नीचे आती है। ये 2 हैं:
- ⭐ ड़, ढ़ (इनसे कभी कोई शब्द शुरू नहीं होता, जैसे- सड़क, गढ़)।
⭐ 5. प्राण-वायु (हवा की मात्रा) के आधार पर वर्गीकरण ⭐
बोलते समय मुख से निकलने वाली हवा (प्राण) की मात्रा के आधार पर व्यंजन 2 प्रकार के होते हैं:
-
⭐ अल्पप्राण (Alp-pran): उच्चारण में मुख से कम हवा निकलती है।
- Trick: प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा, और पाँचवाँ (1, 3, 5) अक्षर + सभी अन्तस्थ (य, र, ल, व) + सभी स्वर अल्पप्राण होते हैं।
- उदाहरण: क, ग, ङ / च, ज, ञ आदि।
- ⭐ महाप्राण (Maha-pran): उच्चारण में मुख से अधिक हवा (हकार की ध्वनि) निकलती है।
- Trick: प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा (2, 4) अक्षर + सभी ऊष्म (श, ष, स, ह) महाप्राण होते हैं।
- उदाहरण: ख, घ / छ, झ आदि।
⭐ 6. घोषत्व (नाद / कंपन) के आधार पर वर्गीकरण ⭐
स्वर-तंत्रियों में होने वाले कंपन (Vibration) के आधार पर 2 प्रकार हैं:
-
⭐ अघोष (Aghosh): उच्चारण में स्वर-तंत्रियों में कंपन नहीं होता।
- Trick: प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा (1, 2) अक्षर + श, ष, स अघोष होते हैं।
- उदाहरण: क, ख / च, छ / ट, ठ।
- ⭐ सघोष / घोष (Saghosh/Ghosh): उच्चारण में स्वर-तंत्रियों में कंपन होता है।
- Trick: प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवाँ (3, 4, 5) अक्षर + सभी अन्तस्थ (य, र, ल, व) + ह + सभी स्वर सघोष होते हैं।
- उदाहरण: ग, घ, ङ / ज, झ, ञ आदि।
⭐ 7. वर्णों के उच्चारण स्थान (Pronunciation Places - रामबाण ट्रिक) ⭐
यहाँ से परीक्षा में शत-प्रतिशत 1 या 2 प्रश्न बनते हैं:
- ⭐ कण्ठ (Throat) - 'अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः': अ, आ, क-वर्ग, ह, और विसर्ग (ः)।
- ⭐ तालु (Palate) - 'इचुयशानां तालु': इ, ई, च-वर्ग, य, और श।
- ⭐ मूर्धा (Hard Palate) - 'ऋटुरषाणां मूर्धा': ऋ, ट-वर्ग, र, और ष।
- ⭐ दन्त (Teeth) - 'लृतुलसानां दन्ताः': त-वर्ग, ल, और स।
- ⭐ ओष्ठ (Lips) - 'उपूपध्मानीयानां ओष्ठौ': उ, ऊ, और प-वर्ग।
- ⭐ नासिका (Nose): प्रत्येक वर्ग का पंचमाक्षर (ङ, ञ, ण, न, म) और अनुस्वार (ं)।
- ⭐ कण्ठ-तालु: ए, ऐ।
- ⭐ कण्ठ-ओष्ठ: ओ, औ।
- ⭐ दन्त-ओष्ठ: व।
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हिंदी वर्णमाला (अध्याय 01)
- 📝 कुल प्रश्न : 50
- ✅ सही उत्तर : 0
- ❌ गलत उत्तर : 0
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