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UPTET EVS Chapter 14: पर्यावरण अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा | 2000+ Words रामबाण नोट्स & 50 MCQ (SK SACHIN CLASSES)

पर्यावरण अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा (UPTET रामबाण महा-एपिसोड) ⭐




नमस्कार दोस्तों स्वागत आपके अपने SK SACHIN CLASSES uptet सीरीज पर आज हम अध्याय 14 अध्ययन करने वाले हैं जो UPTET में रामबाण साबित होगा 

SK SACHIN CLASSES स्पेशल: भावी शिक्षकों, शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET और CTET) में 'पर्यावरण अध्ययन (EVS) की पेडागोजी' सफलता की कुंजी है। प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन केवल पेड़-पौधों का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह बालक को उसके वास्तविक जीवन, समाज और परिवेश से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इस 2000+ शब्दों के विस्तृत लेख में हम अध्याय 14 के हर एक पहलू का सूक्ष्मता से अध्ययन करेंगे ताकि परीक्षा में आपका एक भी अंक न कटे।

​⭐ 1. पर्यावरण (Environment) का शाब्दिक अर्थ एवं व्यापक अवधारणा

​पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों के मेल से हुआ है— 'परि' + 'आवरण'

  • ​⭐ 'परि' का अर्थ होता है - हमारे चारों ओर।
  • ​⭐ 'आवरण' का अर्थ होता है - जो हमें घेरे हुए है। अर्थात, प्रकृति में मौजूद वह सब कुछ जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और हमारे जीवन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। इसमें जैविक (सजीव - जैसे पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य) और अजैविक (निर्जीव - जैसे हवा, पानी, मिट्टी, प्रकाश) दोनों घटक शामिल होते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार पर्यावरण की परिभाषाएं:

  • ​⭐ रॉस (Ross) के अनुसार: "पर्यावरण वह कोई भी बाहरी शक्ति है जो हमें प्रभावित करती है।"
  • ​⭐ वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार: "पर्यावरण में वे सभी बाहरी तत्व आ जाते हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है।"

​⭐ 2. प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) का स्वरूप

​प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर EVS का स्वरूप बहुत ही वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है।

  • ​⭐ कक्षा 1 और 2: NCF 2005 के अनुसार कक्षा 1 और 2 में 'पर्यावरण अध्ययन' की कोई अलग से पुस्तक नहीं होती है। इन छोटी कक्षाओं में बच्चों को EVS का ज्ञान भाषा (Language) और गणित (Mathematics) के माध्यम से ही दिया जाता है। (यह प्रश्न UPTET में कई बार पूछा जा चुका है)।
  • ​⭐ कक्षा 3 से 5: इन कक्षाओं में पर्यावरण अध्ययन को एक 'एकीकृत विषय' (Integrated Subject) के रूप में पढ़ाया जाता है। एकीकृत का अर्थ है कि इसमें तीन मुख्य विषयों का समावेश होता है:
    1. ​विज्ञान (Science)
    2. ​सामाजिक विज्ञान (Social Science)
    3. ​पर्यावरण शिक्षा (Environmental Education)

​⭐ 3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) और पर्यावरण अध्ययन

​NCF-2005 ने EVS शिक्षण की पूरी दिशा ही बदल दी है। इसके अनुसार EVS पढ़ाने के मुख्य सिद्धांत और उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • ​⭐ ज्ञान को बाहरी जीवन से जोड़ना: यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। विद्यालय में जो भी पढ़ाया जाए, उसका सीधा संबंध बालक के घर, परिवार और समाज से होना चाहिए।
  • ​⭐ रटंत विद्या का घोर विरोध: बच्चों को परिभाषाएं या वैज्ञानिक शब्दावली रटाने के बजाय उन्हें 'करके सीखने' (Learning by Doing) का अवसर देना चाहिए।
  • ​⭐ बस्ते का बोझ कम करना: शिक्षा बिना बोझ के (Learning without Burden) होनी चाहिए।
  • ​⭐ सर्वांगीण विकास: बालक का केवल बौद्धिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक, सामाजिक और नैतिक विकास भी होना चाहिए।

​⭐ 4. पर्यावरण अध्ययन की 6 मुख्य थीम (Themes of EVS - विस्तृत विश्लेषण)

​UPTET परीक्षा की दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण भाग है। NCF-2005 ने EVS के पूरे सिलेबस को विषयों (Topics) में बांटने के बजाय 6 मुख्य थीम (Themes) में बांटा है:

  1. ​⭐ परिवार और मित्र (Family and Friends): यह सबसे पहली और बड़ी थीम है। बच्चा सबसे पहले अपने परिवार से ही सीखता है। इस मुख्य थीम के 4 उप-विषय (Sub-themes) भी हैं:
    • ​(a) आपसी संबंध (Relationships)
    • ​(b) काम और खेल (Work and Play)
    • ​(c) जानवर (Animals)
    • ​(d) पौधे (Plants)
  2. ​⭐ भोजन (Food): शरीर के विकास के लिए भोजन आवश्यक है। इसमें बच्चों को संतुलित आहार, भोजन पकाने के तरीके (भूनकर, उबालकर, तलकर, सेंककर), और भोजन के संरक्षण के बारे में सिखाया जाता है।
  3. ​⭐ आश्रय / आवास (Shelter): विभिन्न क्षेत्रों में मौसम के अनुसार घर कैसे बनाए जाते हैं। जैसे— असम में बांस के घर, राजस्थान में मिट्टी और कटीली झाड़ियों के घर, लद्दाख में पत्थर और लकड़ी के घर, और इग्लू (बर्फ का घर)।
  4. ​⭐ जल (Water): जल के स्रोत, जल प्रदूषण, मृत सागर, बारिश के पानी का संरक्षण (Rainwater Harvesting) और तरुण भारत संघ (राजेन्द्र सिंह) जैसे जल संरक्षण प्रयासों की जानकारी।
  5. ​⭐ यात्रा (Travel): भारत की विविधता को समझने के लिए यात्रा महत्वपूर्ण है। इसमें ट्रेन टिकट पढ़ना, दिशाओं का ज्ञान, मानचित्र (Map) पढ़ना, और ऐतिहासिक यात्रियों (जैसे अल-बिरूनी) के बारे में बताया गया है।
  6. ​⭐ चीजें जो हम बनाते हैं और करते हैं (Things we make and do): इसमें इंसानी हुनर, कला, शिल्प, मिट्टी के बर्तन बनाना, बुनाई (पोचमपल्ली) आदि को शामिल किया गया है जो बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान देते हैं।

​⭐ 5. पर्यावरण शिक्षा के मुख्य और व्यापक उद्देश्य

  • ​⭐ जागरूकता एवं संवेदनशीलता (Awareness & Sensitivity): पर्यावरण (पेड़-पौधे, जीव-जंतु, जल, वायु) के प्रति बच्चों में गहरा लगाव और संवेदनशीलता पैदा करना।
  • ​⭐ अवलोकन और अन्वेषण (Observation & Exploration): बच्चों में अपने आस-पास की दुनिया को ध्यान से देखने, सवाल पूछने और नई चीज़ें खोजने की क्षमता का विकास करना।
  • ​⭐ सामाजिक समानता (Social Equality): कक्षा में जेंडर बायस (लिंग रूढ़िवादिता) को खत्म करना और सभी धर्मों, जातियों और वंचित वर्गों के प्रति सम्मान की भावना जगाना।
  • ​⭐ समस्या समाधान कौशल (Problem Solving Skill): स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं (जैसे जल जमाव, प्रदूषण, कचरा) को पहचानना और उनके समाधान के लिए सोचना।

​⭐ 6. EVS की सर्वश्रेष्ठ शिक्षण विधियाँ (Teaching Methods)

​शिक्षक के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बच्चों को किस तरीके से पढ़ाया जाए ताकि वे आसानी से समझ सकें:

  • ​⭐ भ्रमण विधि (Field Trip Method): EVS के लिए यह 'रामबाण' विधि है। जब बच्चों को चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान या किसी कारखाने में ले जाया जाता है, तो वे अपनी आँखों से देखकर (प्रत्यक्ष अनुभव) सीखते हैं, जो कभी नहीं भूलता।
  • ​⭐ प्रोजेक्ट विधि (Project Method): इसके जन्मदाता 'विलियम किलपैट्रिक' हैं। इसमें बच्चों को कोई समस्या दी जाती है (जैसे- अपने मोहल्ले में जल बर्बादी का सर्वे करना), जिसे वे खुद हल करते हैं।
  • ​⭐ कहानी विधि (Story-telling Method): प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को कहानियों में बहुत मज़ा आता है। इससे नीरस विषय भी रोचक बन जाता है और बच्चों की कल्पना शक्ति (Imagination) का विकास होता है।
  • ​⭐ खेल विधि (Play-way Method): इसके जनक 'फ्रोबेल' हैं। बच्चे खेलते-खेलते बहुत सी जटिल बातें सीख जाते हैं।
  • ​⭐ खोज विधि (Heuristic Method): इसके जनक 'आर्मस्ट्रांग' हैं। इसमें बालक स्वयं एक 'नन्हे वैज्ञानिक' की तरह खोज करता है और ज्ञान का निर्माण करता है।

​⭐ 7. EVS में मूल्यांकन और CCE (Continuous and Comprehensive Evaluation)

  • ​⭐ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE): इसका अर्थ है कि बच्चे का मूल्यांकन साल के अंत में सिर्फ एक परीक्षा से नहीं होना चाहिए, बल्कि पढ़ाई के दौरान लगातार (सतत) और बच्चे के हर पहलू (व्यापक - खेलकूद, व्यवहार, पढ़ाई) का मूल्यांकन होना चाहिए।
  • ​⭐ पोर्टफोलियो (Portfolio): यह EVS में मूल्यांकन का सबसे प्रामाणिक टूल है। यह एक प्रकार की फाइल होती है जिसमें बच्चे के पूरे साल के कार्यों, उपलब्धियों, ड्राइंग, और टेस्ट पेपर्स का क्रमबद्ध रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • ​⭐ दृष्टांत अभिलेख (Anecdotal Record): इसमें बच्चे के जीवन या व्यवहार से जुड़ी किसी खास घटना या किस्से का लिखित रिकॉर्ड रखा जाता है।

​⭐ 8. EVS शिक्षक की भूमिका एवं कक्षा का वातावरण

  • ​⭐ शिक्षक को एक 'तानाशाह' नहीं बल्कि एक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) और मार्गदर्शक होना चाहिए।
  • ​⭐ कक्षा का वातावरण 'लोकतांत्रिक' (Democratic) होना चाहिए जहाँ हर बच्चे को बिना डरे सवाल पूछने और अपनी मातृभाषा में बात करने की पूरी आज़ादी हो।
  • ​⭐ शिक्षक को हमेशा विषय-वस्तु को 'मूर्त से अमूर्त' (Concrete to Abstract) और 'ज्ञात से अज्ञात' (Known to Unknown) की ओर पढ़ाना चाहिए।

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पर्यावरण अध्ययन एवं शिक्षा (अध्याय 14)

SK SACHIN CLASSES | UPTET रामबाण मॉक टेस्ट
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