शैक्षिक मूल्यांकन क्रियात्मक शोध एवं नवाचार डीएलएड तृतीय सेमेस्टर के महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न
शैक्षिक मूल्यांकन क्रियात्मक शोध एवं नवाचार
डीएलएड तृतीय सेमेस्टर
महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह 👇👇👇👇👇👇👇👇👇
📘 ब्लू प्रिंट की परिभाषा (Definition of Blueprint):
ब्लू प्रिंट एक पूर्वनिर्धारित रूपरेखा होती है जो यह निर्धारित करती है कि किसी कार्य में कौन-कौन से घटक होंगे, उनकी मात्रा क्या होगी, और वे किस क्रम में या किस प्रकार से पूरे किए जाएंगे।
🎓 शिक्षा में ब्लू प्रिंट का अर्थ:
शिक्षा क्षेत्र में, विशेषकर परीक्षा प्रणाली में, ब्लू प्रिंट का उपयोग प्रश्न पत्र निर्माण के लिए किया जाता है। इसमें यह तय किया जाता है कि:
किस टॉपिक से कितने प्रश्न होंगे,
कितने अंक के प्रश्न होंगे,
किस प्रकार के प्रश्न होंगे (लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, वस्तुनिष्ठ आदि),
कौन से सीखने के स्तर (जैसे – ज्ञान, समझ, प्रयोग) से प्रश्न पूछे जाएंगे।
📋 ब्लू प्रिंट की विशेषताएं:
1. पूर्व नियोजन (Planning): यह एक पूर्व निर्धारित योजना होती है।
2. संतुलन बनाए रखता है: पाठ्यक्रम के सभी हिस्सों को उचित प्रतिनिधित्व देता है।
3. पारदर्शिता लाता है: परीक्षा को निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण बनाता है।
4. शिक्षण और मूल्यांकन में सामंजस्य: शिक्षक क्या पढ़ाएं और छात्र क्या पढ़ें
– इसका स्पष्ट मार्गदर्शन देता है।
रचनात्मक मूल्यांकन क्या है?
परिभाषा:
"रचनात्मक मूल्यांकन वह मूल्यांकन प्रक्रिया है, जो शिक्षण-अधिगम (Teaching-Learning) के दौरान की जाती है, ताकि छात्र की प्रगति, कमजोरियाँ और सीखने में आ रही कठिनाइयों को समय पर पहचान कर सुधार किया जा सके।"
🎯 मुख्य विशेषताएँ (Features):
1. शिक्षण के दौरान किया जाता है – वर्ष के अंत में नहीं, बल्कि पढ़ाई के बीच में।
2. सुधारात्मक प्रकृति – इसका उद्देश्य छात्र की कमजोरियों को दूर करना है।
3. निरंतर प्रक्रिया – यह पूरे सत्र में लगातार चलता है।
4. प्रतिक्रिया आधारित (Feedback) – शिक्षक और छात्र दोनों को सीखने की स्थिति की जानकारी देता है।
5. व्यक्तिगत ध्यान – प्रत्येक छात्र की प्रगति पर नजर रखता है।
📚 रचनात्मक मूल्यांकन के उद्देश्य (Objectives):
छात्र के सीखने के स्तर को समझना।
शिक्षण पद्धति की प्रभावशीलता जांचना।
सीखने में आने वाली कठिनाइयों को समय पर पहचानना।
छात्रों में रुचि और उत्साह बनाए रखना।
उदाहरण:
मान लीजिए शिक्षक ने "गुणा" पढ़ाया। पढ़ाने के बाद वह कुछ छोटे सवाल पूछकर, या वर्कशीट देकर यह देखे कि सभी छात्रों को सही से समझ आया या नहीं। अगर कुछ छात्रों को कठिनाई है, तो तुरंत उन्हें अतिरिक्त अभ्यास कराकर सुधार किया जाए — यही रचनात्मक मूल्यांकन है
मापन (Measurement) क्या है?
परिभाषा:
मापन का अर्थ है किसी वस्तु, गुण या क्षमता की संख्या (संख्यात्मक रूप) में अभिव्यक्ति करना।
📍 शिक्षा में मापन का मतलब –
किसी छात्र के ज्ञान, कौशल या व्यवहार को अंकों, ग्रेड या स्कोर में व्यक्त करना।
उदाहरण:
परीक्षा में 50 में से 40 अंक पाना।
ऊँचाई 150 सेंटीमीटर मापना।
विशेषताएँ:
केवल संख्या देता है, अच्छा या बुरा नहीं बताता।
मात्रात्मक (Quantitative) प्रक्रिया है।
उदाहरण – टेस्ट स्कोर, प्रतिशत, ग्रेड।
2. मूल्यांकन (Evaluation) क्या है?
परिभाषा:
मूल्यांकन का अर्थ है किसी वस्तु, व्यक्ति या कार्य के गुणवत्ता, योग्यता और उपयोगिता का निर्धारण करना, जिसमें मापन के साथ-साथ निर्णय (Judgement) भी शामिल होता है।
शिक्षा में मूल्यांकन का मतलब –
छात्र के अंकों के आधार पर यह निर्णय लेना कि उसने विषय को कितना सीखा, किस स्तर पर है, और उसमें सुधार की आवश्यकता है या नहीं।
उदाहरण:
40/50 अंक देखकर कहना "छात्र ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया"।
किसी निबंध को पढ़कर उसकी भाषा, विषय-वस्तु और रचनात्मकता का मूल्य निर्धारण करना।
विशेषताएँ:
गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों होती है।
निर्णयात्मक (Judgemental) होती है।
मापन के साथ-साथ विश्लेषण भी करती है।
मापन और मूल्यांकन में अंतर
संक्षेप में -
रेमार्श तथा गेज के अनुसार -
मापन (Measurement) → “कितना?” (How much?)
मूल्यांकन (Evaluation) → “कितना अच्छा?” (How good?)
प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली क्या है?
सरल परिभाषा:
प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली वह तरीका है, जिससे हम छात्रों की पढ़ाई, समझ, कौशल और व्यवहार को सही, निष्पक्ष और पूरी तरह से जांचते हैं, ताकि उनकी प्रगति का सही पता चल सके और जरूरत पड़ने पर सुधार किया जा सके।
🎯 मुख्य बातें:
1. निरंतर हो – सालभर या पढ़ाई के दौरान नियमित रूप से किया जाए, सिर्फ साल के अंत में नहीं।
2. संपूर्ण हो – केवल लिखित परीक्षा नहीं, बल्कि मौखिक, प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट और खेल-कूद जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हों।
3. निष्पक्ष हो – सभी छात्रों के लिए एक जैसा मौका और बिना पक्षपात के।
4. विभिन्न तरीकों से हो – टेस्ट, असाइनमेंट, सवाल-जवाब, अवलोकन आदि।
5. सुधार में मदद करे – छात्रों और शिक्षक को यह बताने में मदद करे कि कहाँ सुधार की जरूरत है।
📝 संक्षेप में याद रखने का तरीका:
प्रभावी मूल्यांकन प्रणाली = सही + निष्पक्ष +
निरंतर + संपूर्ण + सुधार करने वाली
अवलोकन की परिभाषा (सरल शब्दों में):
अवलोकन मतलब किसी व्यक्ति, वस्तु, घटना या प्रक्रिया को ध्यान से देखना, ताकि उसके बारे में सही जानकारी प्राप्त की जा सके।
सतत मूल्यांकन
सरल परिभाषा:
सतत और सामान्य मूल्यांकन एक ऐसी मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें छात्रों की प्रगति का आंकलन पूरे साल अलग-अलग समय पर किया जाता है, न कि सिर्फ साल के अंत में परीक्षा लेकर।
क्रियात्मक शोध (Action Research)
क्रियात्मक शोध एक ऐसी शोध पद्धति है, जिसमें शिक्षक या प्रशिक्षक अपने शिक्षण कार्य में आने वाली समस्याओं को पहचानकर, उनके समाधान के लिए तुरंत और व्यवस्थित रूप से कार्य करता है।
यह शोध सीधे व्यवहार में सुधार और सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने पर केंद्रित होती है।
क्रियात्मक शोध के चरण
(1) समस्या की पहचान
कक्षा या शिक्षण प्रक्रिया में आने वाली किसी विशेष समस्या को ढूँढना।
उदाहरण: "छात्र गणित के भिन्न (fractions) ठीक से नहीं समझ पा रहे हैं।"
(2) समस्या का विश्लेषण
कारण पता लगाना कि यह समस्या क्यों हो रही है।
उदाहरण: "शायद भिन्न पढ़ाने की पद्धति कठिन है या पर्याप्त उदाहरण नहीं दिए गए।"
(3) उद्देश्य निर्धारित करनना
शोध से क्या सुधार करना है, यह तय करना।
उदाहरण: "भिन्न के अध्याय में छात्रों की समझ बढ़ाना।"
(4) योजना बनाना
सुधार के लिए प्रयोगात्मक कदम तय करना।
उदाहरण: चित्र, गतिविधि, खेल और उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाना।
(5) योजना का कार्यान्वयन
कक्षा में उस योजना को लागू करना।
(6) डेटा संग्रह और अवलोकन
देखना कि बदलाव के बाद छात्रों में क्या सुधार हुआ।
(7) परिणाम का विश्लेषण
आंकड़ों और अवलोकन के आधार पर यह तय करना कि योजना सफल रही या नहीं।
(8) निष्कर्ष और सुधार
जो तरीका अच्छा रहा, उसे अपनाना; जो कमज़ोर रहा, उसमें बदलाव करना।
क्रियात्मक शोध की विशेषताएं
तत्काल समाधान पर केंद्रित – लंबे समय की बजाय त्वरित सुधार लाना।
व्यावहारिक – शोध कक्षा या कार्यस्थल में किया जाता है।
भागीदारी आधारित – शिक्षक, छात्र और कभी-कभी अभिभावक भी शामिल होते हैं।
सतत प्रक्रिया – लगातार किया जा सकता है, एक बार तक सीमित नहीं।
छोटे पैमाने पर – पूरे देश या राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि छोटी समूह या कक्षा में किया जाता है।
👉👉याद रखे - क्रियात्मक शोध तथा क्रियात्मक अनुसंधान एक ही है ।
क्रियात्मक शोध / क्रियात्मक अनुसंधान
वह शोध, जिसमें शिक्षक अपनी कक्षा या कार्य-क्षेत्र की किसी समस्या का समाधान स्वयं करता है, उसे क्रियात्मक शोध कहते हैं।
मुख्य उद्देश्य – कार्य में सुधार और समस्या का तुरंत समाधान।
👉👉मूल्यांकन प्रक्रिया के मुख्य भाग
शिक्षा मनोविज्ञान में मूल्यांकन को दो तरह से वर्गीकृत किया जाता है –
1. प्रकृति के आधार पर (Nature-based Classification)
1. प्रारंभिक मूल्यांकन (Initial / Placement Evaluation) – पढ़ाई शुरू करने से पहले बच्चों की पूर्व-ज्ञान, क्षमता, पृष्ठभूमि आदि जानने के लिए।
2. गठनात्मक मूल्यांकन (Formative Evaluation) – पढ़ाई के दौरान बच्चों की प्रगति मापने के लिए।
3. सारांशात्मक मूल्यांकन (Summative Evaluation) – पढ़ाई पूरी होने के बाद परिणाम जानने के लिए।
2. आधुनिक शिक्षा नीति के आधार पर
1. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE – Continuous and Comprehensive Evaluation) –
इसमें गठनात्मक + सारांशात्मक दोनों शामिल होते हैं।
इसका उद्देश्य केवल परीक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण विकास मापना है (ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य आदि)।
👉👉याद रखे - गठनात्मक मूल्यांकन को रचनात्मक मूल्यांकन कहा जाता है।
सारांशात्मक मूल्यांकन को योगात्मक मूलांक कहा जाता है।
ये दोनों मूल्यांकन के प्रमुख प्रकार हैं।
❗ ज़रूरी अंतर
प्रारंभिक मूल्यांकन — CCE का हिस्सा नहीं है, यह पढ़ाई शुरू होने से पहले होता है।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) — पढ़ाई के दौरान और बाद में लगातार व व्यापक रूप से होता है।
इसलिए दोनों एक नहीं हैं, बल्कि CCE में मुख्य रूप से गठनात्मक और सारांशात्मक मूल्यांकन आते हैं, प्रारंभिक मूल्यांकन अलग श्रेणी है।
समुदाय सहभागिता क्या है?
शिक्षा के संदर्भ में
स्कूल शिक्षा में समुदाय सहभागिता का मतलब है —
शिक्षण व्यवस्था में अभिभावक, ग्राम पंचायत, स्थानीय संस्थाएँ, सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर स्कूल की पढ़ाई, सुविधाओं, और बच्चों के विकास में सहयोग करें, समुदाय सहभागिता कहलाता है।
उदाहरण:
1. विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक में भाग लेना।
2. बच्चों के लिए अभिभावक-शिक्षक सम्मेलन।
3. स्कूल भवन निर्माण, पुस्तक दान, सफाई अभियान।
शिक्षा में भूमिका
1. विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) में भागीदारी।
2. अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM)।
3. स्कूल में साफ-सफाई, पौधारोपण, भवन निर्माण में सहयोग।
4. पुस्तक, कॉपी, खेल सामग्री का दान।
5. बच्चों के नामांकन और उपस्थिति ब
ढ़ाने में मदद।
क्रियात्मक शोध की परिभाषा (मनोवैज्ञानिक द्वारा)
स्टीफ़न एम. कोरी (Stephen M. Corey) के अनुसार —
“क्रियात्मक शोध वह प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक अपनी कक्षा में होने वाली समस्याओं की पहचान करके, उन्हें हल करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करता है।”
क्रियात्मक शोध एक ऐसा शोध है, जिसे शिक्षक अपनी शिक्षण प्रक्रिया या कक्षा की समस्याओं को सुधारने और हल करने के लिए करता है।
सतत मूल्यांकन (Continuous Evaluation)
परिभाषा –
सतत मूल्यांकन वह प्रक्रिया है, जिसमें छात्र की प्रगति को पूरे शिक्षण सत्र के दौरान नियमित रूप से जांचा और परखा जाता है, न कि केवल साल के अंत में एक परीक्षा लेकर।
महत्व
1. लगातार प्रगति का पता चलता है –
शिक्षक को हर समय छात्र की पढ़ाई और समझ की जानकारी मिलती रहती है।
2. कमज़ोरियों का समय पर सुधार –
यदि कोई छात्र किसी विषय में पीछे है, तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
3. अधिक सटीक मूल्यांकन –
केवल एक बार परीक्षा लेने की बजाय, बार-बार मूल्यांकन से वास्तविक योग्यता पता चलती है।
4. सीखने की आदत में सुधार –
छात्र पूरे साल पढ़ाई पर ध्यान देता है क्योंकि मूल्यांकन निरंतर होता है।
5. तनाव कम होता है –
साल के अंत में एक बड़ी परीक्षा का दबाव कम हो जाता है।
साक्षात्कार (Interview)
किसी उद्देश्यपूर्ण प्रश्नोत्तर प्रक्रिया, जिसमें दो या अधिक व्यक्ति आमने-सामने मिलकर जानकारी का आदान–प्रदान करते हैं, उसे साक्षात्कार कहते हैं।"
उद्देश्य –
जानकारी जुटाना
किसी की योग्यता या कौशल का मूल्यांकन करना
विचार, राय या अनुभव जानना
ब्लूम टैक्सोनॉमी का महत्व
शिक्षक को पाठ्यक्रम की योजना बनाने में मदद करता है।
प्रश्न-पत्र निर्माण और मूल्यांकन को संतुलित बनाता है।
छात्रों के सोचने और रचनात्मकता के स्तर को बढ़ाता है।
सीखने को निचले स्तर से उच्च स्तर तक क्रमबद्ध करता है
📌 सही जानकारी:
"मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिक्षक एवं छात्र यह निर्णय करते हैं कि शिक्षण लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है या नहीं।"
यह परिभाषा क्रॉनबेक (Cronbach) को ही अधिकतर शैक्षिक मनोविज्ञान की प्रामाणिक पुस्तकों में दी गई है।
👉👉👉 न्यादर्श क्या है ?
शिक्षण शोध प्रक्रिया में वह छोटा से छोटा भाग जो विद्यार्थियों को आसानी से समझने में मदद करे , न्यादर्श कहलाता है ।
जैसे - ग्लोब, चार्ट, मानव कंकाल का छोटा मॉडल आदि ।
परीक्षण क्या है ?
किसी व्यक्ति के ज्ञान, कौशल या क्षमता को मापने की प्रक्रिया को परीक्षण कहते हैं।"
📌 उदाहरण:
गणित का टेस्ट लेकर यह जानना कि छात्र जोड़, घटाव सही कर पा रहा है या नहीं।
विज्ञान के प्रैक्टिकल टेस्ट से यह देखना कि प्रयोग सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं।
व्यापक मूल्यांकन (परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर)
व्यापक मूल्यांकन वह प्रक्रिया है, जिसमें छात्र के ज्ञान, कौशल, समझ, व्यवहार, दृष्टिकोण और व्यक्तित्व जैसे सभी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। इसका उद्देश्य छात्र के संपूर्ण विकास को मापना है, न कि केवल उसके शैक्षणिक प्रदर्शन को।
उदाहरण – पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कला, सामाजिक गतिविधियों और नैतिक मूल्यों का मूल्यांकन करना।
👉👉👉
ब्लूम ने मूल्यांकन के संज्ञानात्मक पक्ष में क्रियाओं को कितने वर्गों में विभाजित किया है?
ब्लूम ने मूल्यांकन के संज्ञानात्मक पक्ष में क्रियाओं को 6 वर्गों में विभाजित किया है—
1. ज्ञान (Knowledge)
2. बोध / समझ (Comprehension)
3. प्रयोग (Application)
4. विश्लेषण (Analysis)
5. संश्लेषण (Synthesis)
6. मूल्यांकन (Evaluation)
ब्लूम की संज्ञानात्मक वर्गीकरण को इस तरह भी लिखा जा सकता है—
निम्न स्तर → ज्ञान, बोध/समझ, प्रयोग
मध्य स्तर → विश्लेषण, संश्लेषण
उच्च स्तर → मूल्यांकन
यह वर्गीकरण परीक्षा में लिखने पर आपको पूरे अंक दिलाएगा, क्योंकि यह संक्षिप्त और सही है।
परीक्षा और मापन में अंतर
संक्षिप्त परीक्षा योग्य उत्तर:
"परीक्षण एक नियोजित साधन है जिसके द्वारा ज्ञान, कौशल अथवा योग्यता का पता लगाया जाता है, जबकि मापन उस परीक्षण से प्राप्त परिणामों को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करने की प्रक्रिया है।"
✅
पुनर्बलन (Reinforcement) का अर्थ
👉 शिक्षा मनोविज्ञान में पुनर्बलन का अर्थ है —
किसी वांछित व्यवहार या प्रतिक्रिया को दोहराने और मज़बूत करने हेतु प्रोत्साहन देना।
यानि जब छात्र कोई सही उत्तर देता है या अच्छा व्यवहार दिखाता है और उसे प्रशंसा, इनाम, मुस्कान या प्रोत्साहन मिलता है, तो वह उस व्यवहार को फिर से करने के लिए प्रेरित होता है।
🔹 सरल उदाहरण
1. शिक्षक ने छात्र को सही उत्तर देने पर “बहुत अच्छा” कहा।
→ यह सकारात्मक पुनर्बलन है।
2. गलत उत्तर पर दंड या डाँट से बचाने के लिए शिक्षक ने उसे सही दिशा दिखाई।
→ यह नकारात्मक पुनर्बलन है।
📖 परीक्षा लिखने योग्य उत्तर :
“विद्यार्थियों में वांछित व्यवहार को दोहराने हेतु दी गई प्रोत्साहनात्मक क्रिया को पुनर्बलन कहते हैं। जैसे– सही उत्तर पर प्रशंसा करना।” ✅
परीक्षण की वैधता (Validity of Test) से तात्पर्य
👉 वैधता का अर्थ है –
कोई परीक्षण जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया है, वह वास्तव में उसी को कितनी सही मापता है।
यानि यदि परीक्षा का उद्देश्य “गणितीय गणना क्षमता” को मापना है, तो प्रश्न-पत्र वास्तव में गणितीय गणना की क्षमता ही मापे, न कि भाषा-ज्ञान या रटने की क्षमता।
🔹 सरल उदाहरण
1. यदि हिंदी भाषा का परीक्षण है, और उसमें केवल सामान्य ज्ञान के प्रश्न दिए गए हैं, तो यह वैध नहीं है।
2. गणितीय समस्या-समाधान की परीक्षा में गणना आधारित प्रश्न देना वैधता को दर्शाता है।
📖 परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर
“परीक्षण की वैधता से तात्पर्य है कि परीक्षण अपने निर्धारित उद्देश्यों को किस सीमा तक मापता है। उदाहरण– गणित की परीक्षा में यदि प्रश्न केवल गणितीय योग्यता मापते हों तो वह वैध मानी जाएगी।” ✅
A) शैक्षिक मूल्यांकन में मापन के प्रकार
👉 यह वर्गीकरण शिक्षाशास्त्र व D.El.Ed परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
1. निरपेक्ष मापन (Absolute Measurement)
इसमें मापन की इकाई स्थिर और निश्चित होती है।
यहाँ कोई तुलना या अनुमान की आवश्यकता नहीं होती।
जैसे – लंबाई को मीटर में, वजन को किलोग्राम में, समय को सेकण्ड में नापना।
शिक्षा में – यदि कोई छात्र 10 में से 10 प्रश्न सही करता है, तो यह निरपेक्ष मापन है।
2. सामान्यीकृत मापन (Standardized Measurement)
इसमें मापन को किसी मानक (Standard) के आधार पर किया जाता है।
व्यक्ति की उपलब्धि या योग्यता को दूसरों से तुलना करके आँका जाता है।
जैसे – IQ Test, Achievement Test में अंक किसी "नॉर्म ग्रुप" से तुलना की जाती है।
शिक्षा में – बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंक को पूरे वर्ग या समाज के मानक से तुलना करना।
3. इसेप्टिव मापन (Ipsative Measurement)
इसमें व्यक्ति की तुलना स्वयं से की जाती है।
यानी, विद्यार्थी ने पहले की अपेक्षा प्रगति की या नहीं?
जैसे – पिछले परीक्षा में 40% अंक थे और अब 60% आए → सुधार हुआ।
शिक्षा में – "Progress Report" इसी मापन का उदाहरण है
✅ निष्कर्ष – D.El.Ed परीक्षा में अक्सर यही तीन प्रकार लिखने होते हैं।
✨ (B) सांख्यिकी व मनोविज्ञान में मापन के स्तर (Scales of Measurement)
👉 यह वर्गीकरण S.S. Stevens (1946) ने दिया था।
1. शाब्दिक मापन (Nominal Scale)
केवल नाम या वर्गीकरण बताता है।
कोई क्रम या मात्रा नहीं होती।
उदाहरण – लड़के/लड़कियाँ, जाति, धर्म, रक्त समूह।
2. क्रमित मापन (Ordinal Scale)
इसमें में वस्तुओं को किसी क्रम/रैंक में रखा जाता है।
लेकिन इनके बीच का अंतराल निश्चित नहीं होता।
उदाहरण – कक्षा में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान।
3. अंतराल मापन (Interval Scale)
इसमें अंतराल समान होता है लेकिन शून्य सापेक्ष नहीं होता।
उदाहरण – तापमान (0° C का मतलब ताप की अनुपस्थिति नहीं है)।
शिक्षा में – अंकपत्र (Marks 40, 60, 80 → अंतर समान है)।
4. अनुपात मापन (Ratio Scale)
इसमें समान अंतराल और सापेक्ष शून्य दोनों होते हैं।
इसका सबसे उच्च स्तर का मापन है।
उदाहरण – ऊँचाई, वजन, आयु, परीक्षा का प्राप्तांक (0 का मतलब सचमुच 0 है)।
✅ निष्कर्ष –👉👉
अगर प्रश्न मापन के प्रकार (Educational Measurement) पूछा है → (निरपेक्ष, सामान्यीकृत, इसेप्टिव) लिखें
अगर प्रश्न मापन के स्तर / Scales of Measurement पूछा है → (शाब्दिक, क्रमित, अंतराल, अनुपात) लिखें।

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