UPTET 2026 बाल विकास Chapter 18: समायोजन और रक्षा युक्तियाँ (Defense Mechanisms) | SK SACHIN CLASSES
🌟 UPTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 18 - समायोजन और रक्षा युक्तियाँ (विस्तृत नोट्स) 🌟
दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास (CDP) सीरीज़ में आज हम मनोविज्ञान के एक ऐसे अध्याय पर चर्चा करेंगे जो सीधे तौर पर हमारे दैनिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है— समायोजन (Adjustment) और रक्षा युक्तियाँ (Defense Mechanisms)।
UPTET की परीक्षा में इस अध्याय से 'प्रक्षेपण', 'युक्तिकरण (Rationalization)' और 'प्रतिगमन' जैसे टॉपिक पर सीधे उदाहरण देकर प्रश्न पूछे जाते हैं। एक शिक्षक के रूप में यह जानना ज़रूरी है कि जब बच्चा तनाव या कुंठा में होता है, तो वह अपना बचाव कैसे करता है। आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
🔹 1. समायोजन का अर्थ (Meaning of Adjustment)
'समायोजन' (Adjustment) दो शब्दों से मिलकर बना है: सम् + आयोजन। इसका अर्थ है परिस्थितियों के अनुसार खुद को अच्छी तरह से ढाल लेना।
मनोविज्ञान में, "व्यक्ति की अपनी आवश्यकताओं (Needs) और वातावरण (Environment) की माँगों के बीच एक अच्छा 'संतुलन' (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही समायोजन कहते हैं।"
जो व्यक्ति जितनी जल्दी नई परिस्थिति में ढल जाता है, उसका मानसिक स्वास्थ्य उतना ही अच्छा माना जाता है।
UPTET के लिए महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (रट लें):
1. बी. एफ. स्किनर (B.F. Skinner) के अनुसार:
"समायोजन अधिगम (सीखने) की एक प्रक्रिया है।"
2. गेट्स एवं अन्य (Gates) के अनुसार:
"समायोजन निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने और वातावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन करता है।"
3. बोरिंग (Boring) के अनुसार:
"वातावरण के साथ सामान्य और स्थायी समायोजन ही व्यक्तित्व है।"
🔹 2. कुसमायोजन (Maladjustment) और उसके मुख्य कारण
जब व्यक्ति अपनी ज़रूरतों और वातावरण के बीच संतुलन नहीं बना पाता, तो वह 'कुसमायोजित' हो जाता है। कुसमायोजन से व्यक्ति के अंदर कई प्रकार की मानसिक बीमारियाँ या विकार पैदा होते हैं।
UPTET में इन चार शब्दों का अंतर सबसे ज़्यादा पूछा जाता है:
A. तनाव (Stress):
जब व्यक्ति की आवश्यकताएं पूरी नहीं होतीं या समय कम होता है और काम ज़्यादा, तो उसके मन में जो खिंचाव या बेचैनी पैदा होती है, उसे तनाव कहते हैं। (जैसे- परीक्षा के ठीक एक दिन पहले होने वाली घबराहट)।
B. दबाव (Pressure):
जब व्यक्ति पर सफलता प्राप्त करने के लिए बाहरी वातावरण (माता-पिता, समाज) का भारी बोझ होता है। "मुझे हर हाल में UPTET पास करना ही होगा, वरना लोग क्या कहेंगे"— यह दबाव है।
C. कुंठा / भग्नाशा (Frustration):
जब व्यक्ति किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बार-बार प्रयास करता है, लेकिन बार-बार असफल हो जाता है, तो उसके मन में जो निराशा और क्रोध पैदा होता है, उसे कुंठा (Frustration) कहते हैं।
D. दुश्चिंता (Anxiety):
यह भविष्य के प्रति एक अज्ञात डर है। "अगर मैं परीक्षा में फेल हो गया तो मेरा क्या होगा?"— भविष्य के परिणाम को लेकर अकारण डरना दुश्चिंता है।
E. द्वंद्व / संघर्ष (Conflict):
जब व्यक्ति के सामने एक ही समय में दो अलग-अलग रास्ते या लक्ष्य आ जाएं और उसे उनमें से किसी एक को चुनना हो। (जैसे- एक ही दिन UPTET का पेपर हो और उसी दिन रेलवे का पेपर भी हो)।
🔹 3. रक्षा युक्तियाँ / मनोरचनाएं (Defense Mechanisms)
(नोट: यह UPTET के लिए इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण 'रामबाण' हिस्सा है। यहाँ से 100% प्रश्न छपते हैं।)
जब व्यक्ति तनाव या कुंठा से घिर जाता है, तो उसका 'अहम्' (Ego) उसे पागल होने से बचाने के लिए कुछ मनोवैज्ञानिक ढालों या तरकीबों का इस्तेमाल करता है। इन्हें ही 'रक्षा युक्तियाँ' (Defense Mechanisms) कहते हैं।
- जनक: रक्षा युक्तियों का संप्रत्यय सबसे पहले ऑस्ट्रिया के मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने दिया था। बाद में उनकी बेटी 'एना फ्रायड' ने इसे विस्तार से समझाया।
- ये युक्तियाँ व्यक्ति के 'अचेतन मन' (Unconscious Mind) में काम करती हैं, यानी व्यक्ति को खुद पता नहीं होता कि वह झूठ बोल रहा है या बहाना बना रहा है।
समायोजन की विधियों को मुख्य रूप से 2 भागों में बांटा जाता है:
🌟 A. प्रत्यक्ष उपाय (Direct Methods)
जब व्यक्ति समस्या का सीधे तौर पर सामना करता है:
- बाधा को नष्ट करना: जो चीज़ रोक रही है, उसे हटा देना।
- मार्ग बदलना: अगर एक तरीके से UPTET पास नहीं हो रहे, तो पढ़ने का तरीका (मार्ग) बदल देना।
- लक्ष्य का प्रतिस्थापन (बदलना): अगर आईएएस (IAS) नहीं बन पाए, तो शिक्षक (Teacher) बनकर संतुष्ट हो जाना।
- विश्लेषण और निर्णय: समस्या को समझकर सही फैसला लेना।
🌟 B. अप्रत्यक्ष उपाय / रक्षा युक्तियाँ (Indirect Methods)
जब व्यक्ति समस्या से भागता है या बहाने बनाता है:
1. दमन (Repression):
दुखद और कष्टदायक यादों को बलपूर्वक (ज़बरदस्ती) 'अचेतन मन' में धकेल देना। (जैसे- किसी भयानक एक्सीडेंट की याद को भूलने की कोशिश करना)।
2. शमन (Suppression):
जानबूझकर, अपनी इच्छा से (चेतन मन से) किसी बात को भुलाने का प्रयास करना। (दमन अचेतन होता है, शमन चेतन होता है)।
3. प्रक्षेपण (Projection) - [सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला]:
अपनी गलती, अपनी कमी या अपनी असफलता का दोष किसी 'दूसरे' पर या हालात पर डाल देना।
- UPTET उदाहरण 1: "नाच न जाने, आंगन टेढ़ा" (खुद नाचना नहीं आता, और कह रहे हैं कि आंगन खराब है)।
- UPTET उदाहरण 2: परीक्षा में फेल होने पर छात्र का कहना कि "शिक्षक ने ही सही से नहीं पढ़ाया था" या "पेपर आउट ऑफ सिलेबस था"।
4. युक्तिकरण / औचित्य स्थापन (Rationalization):
किसी काम में असफल होने पर उसे जायज़ ठहराने के लिए 'तर्क' (बहाने) देना या उस चीज़ को ही 'खराब' बता देना।
- UPTET उदाहरण 1: "अंगूर खट्टे हैं" (लोमड़ी को अंगूर नहीं मिले, तो उसने कहा कि अंगूर खट्टे हैं, मुझे खाने ही नहीं थे)।
- UPTET उदाहरण 2: "नींबू मीठे हैं" (यदि बहुत कोशिश के बाद भी केवल नींबू मिला, तो खुद को समझा लेना कि नींबू मीठे हैं)।
5. तादात्मीकरण / आत्मीकरण (Identification):
जब व्यक्ति खुद कुछ नहीं कर पाता, तो वह किसी 'सफल व्यक्ति' या संस्था के साथ अपना नाम जोड़कर खुद को सफल महसूस करता है।
- UPTET उदाहरण: पड़ोस के लड़के का आईएएस (IAS) बन जाने पर पूरे मोहल्ले को बताना कि "वह तो मेरे ही चाचा का लड़का है।"
6. विस्थापन (Displacement):
अपने गुस्से (क्रोध) को उस व्यक्ति पर नहीं निकालना जिस पर गुस्सा आया है, बल्कि किसी कमज़ोर या दूसरे व्यक्ति पर उतार देना।
- UPTET उदाहरण: ऑफिस में बॉस (Boss) से डांट खाने के बाद, घर आकर अपनी पत्नी या बच्चों पर गुस्सा उतारना।
7. प्रतिगमन (Regression):
'प्रतिगमन' का अर्थ है पीछे लौटना। तनाव या दुख की स्थिति में अपने से 'कम उम्र' (बचपन) वाले व्यवहार करना।
- UPTET उदाहरण 1: एक बड़ी लड़की का अपने मायके जाते समय छोटे बच्चों की तरह ज़ोर-ज़ोर से रोना।
- UPTET उदाहरण 2: एक वयस्क (बड़े) व्यक्ति का घुटनों के बल सिर रखकर छोटे बच्चों की तरह फूट-फूट कर रोना।
8. प्रतिक्रिया निर्माण / विपरीत रचना (Reaction Formation):
व्यक्ति के मन में जो चल रहा होता है, वह ठीक उसके 'उल्टा' व्यवहार करता है। अपनी असली इच्छा को छिपाने के लिए विपरीत दिखावा करना।
- UPTET उदाहरण 1: "मुंह में राम, बगल में छुरी" (अंदर से दुश्मन है, बाहर से दोस्त होने का नाटक)।
- UPTET उदाहरण 2: किसी से बहुत नफरत करना, लेकिन सामने आने पर बहुत ज़्यादा सम्मान और मीठा बोलने का दिखावा करना।
9. उदारीकरण / मार्गान्तरीकरण / शोधन (Sublimation):
व्यक्ति की किसी बुरी या असामाजिक प्रवृत्ति (गुस्सा, कामुकता) को एक अच्छे और सामाजिक कार्य में बदल देना। यह सबसे श्रेष्ठ रक्षा युक्ति मानी जाती है।
- UPTET उदाहरण 1: तुलसीदास का अपनी पत्नी के प्रति अत्यधिक कामुकता को 'रामभक्ति' (रामचरितमानस की रचना) में बदल देना।
- UPTET उदाहरण 2: एक बहुत ही ज़्यादा गुस्से वाले और लड़ाकू लड़के का एक बेहतरीन 'मुक्केबाज़' (Boxer) बन जाना।
10. क्षतिपूर्ति (Compensation):
एक क्षेत्र की कमी को किसी दूसरे क्षेत्र में मेहनत करके पूरा कर लेना।
- UPTET उदाहरण: पढ़ाई (गणित) में बहुत कमज़ोर लड़की का संगीत या खेलकूद में बहुत बड़ा नाम कमा लेना।
11. दिवास्वप्न / हवाई किले बनाना (Day-Dreaming):
हकीकत में जो नहीं मिल रहा, उसे ख्यालों (कल्पनाओं) में सोचकर खुश होना।
- UPTET उदाहरण: एक बहुत ही गरीब छात्र का सपने देखना कि वह एक दिन हेलीकॉप्टर खरीद रहा है।
🔹 4. एक समायोजित व्यक्ति की विशेषताएँ
एक स्वस्थ और समायोजित व्यक्ति की पहचान क्या है?
- उसे अपनी खूबियों और अपनी कमियों का पूरा ज्ञान होता है।
- वह अपनी भावनाओं और संवेगों (गुस्सा, प्यार, डर) पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
- वह हकीकत (Reality) में जीता है, ख्यालों में नहीं।
- वह परिस्थितियों के अनुसार खुद को आसानी से बदल लेता है।
🔹 5. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)
UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ सीधे और सटीक बिंदु जिन्हें आपको बिल्कुल रट लेना है:
- रक्षा युक्तियाँ (Defense Mechanisms): यह अचेतन मन की प्रक्रिया है। इसका जनक सिगमंड फ्रायड को माना जाता है।
- "अंगूर खट्टे हैं" — यह युक्तिकरण / औचित्य स्थापन (Rationalization) का उदाहरण है।
- "नाच न जाने आंगन टेढ़ा" — यह प्रक्षेपण (Projection) का उदाहरण है।
- एक क्लर्क को बॉस ने डांटा, क्लर्क ने घर आकर कुत्ते को लात मारी — यह विस्थापन (Displacement) का उदाहरण है।
- जब एक विकलांग बच्चा पढ़ाई में टॉप कर जाए — यह क्षतिपूर्ति (Compensation) का उदाहरण है।
- वाल्मीकि का महान कवि बन जाना — यह मार्गान्तरीकरण (Sublimation) का उदाहरण है।
- "समायोजन निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है" — यह परिभाषा गेट्स की है।
निष्कर्ष (Conclusion): जीवन में तनाव और मुश्किलें आना स्वाभाविक है। एक श्रेष्ठ शिक्षक वही है जो अपने छात्रों की मानसिक स्थिति को समझे। यदि कोई छात्र फेल होने पर बहाने (प्रक्षेपण/युक्तिकरण) बना रहा है, तो शिक्षक को उसे डांटने के बजाय उसकी कमियों का 'निदान' (Diagnostic) करके उसे सही मार्ग दिखाना चाहिए। एक समायोजित शिक्षक ही एक समायोजित कक्षा का निर्माण कर सकता है।
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