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UPTET 2026 बाल विकास Chapter 22: क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) | SK SACHIN CLASSES

 

​🌟 UPTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 22 - क्रियात्मक अनुसंधान (विस्तृत नोट्स) 🌟




हेलो दोस्तों स्वागत आपके अपने SK SACHIN CLASSES में।

​दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास और शिक्षण शास्त्र सीरीज़ में आज हम एक ऐसे अध्याय पर चर्चा करेंगे जो सीधे तौर पर एक शिक्षक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और स्कूल की समस्याओं से जुड़ा है— क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research)।

​जब आप एक शिक्षक बनेंगे, तो आपको कक्षा में कई समस्याएं आएँगी (जैसे- बच्चे का रोज़ स्कूल से भाग जाना, बच्चों का गणित में फेल होना, या स्कूल में चोरी होना)। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए जब शिक्षक खुद एक वैज्ञानिक तरीके से जाँच करता है, तो उसे 'क्रियात्मक अनुसंधान' कहते हैं। आइए, इसे बहुत ही आसान भाषा में और UPTET के तथ्यों के साथ समझते हैं।





​🔹 1. क्रियात्मक अनुसंधान का अर्थ और पृष्ठभूमि (Meaning & Background)

​'अनुसंधान' (Research) का अर्थ है किसी सत्य या ज्ञान की खोज करना। 'क्रियात्मक' का अर्थ है जो कार्य (Action) के दौरान किया जाए।

​मनोविज्ञान में अर्थ: "विद्यालय की दिन-प्रतिदिन (Daily) की समस्याओं को सुलझाने और स्कूल की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और स्कूल के कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला अनुसंधान ही क्रियात्मक अनुसंधान कहलाता है।"

​UPTET के लिए अति-महत्वपूर्ण तथ्य (जनक/Propounders):

  • ​शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग: 'क्रियात्मक अनुसंधान' शब्द का सबसे पहली बार प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के समय कोलियर (Collier) और कर्ट लेविन (Kurt Lewin) ने समाजशास्त्र के क्षेत्र में किया था।
  • ​शिक्षा के क्षेत्र में जनक (रामबाण तथ्य): शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक अनुसंधान का जनक स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey) को माना जाता है। इन्होंने 1953 में अपनी पुस्तक "Action Research to Improve School Practices" में इसका विस्तार से वर्णन किया था।







​🔹 2. मौलिक अनुसंधान और क्रियात्मक अनुसंधान में अंतर (Fundamental vs Action Research)

​UPTET में इन दोनों के बीच का अंतर बहुत बार पूछा जाता है:

​A. मौलिक / मूलभूत अनुसंधान (Fundamental / Basic Research):

  • ​कर्ता: यह बड़े वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है।
  • ​उद्देश्य: इसका उद्देश्य नए सिद्धांतों, नियमों या थ्योरी का निर्माण करना होता है (जैसे- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम)।
  • ​क्षेत्र: इसका क्षेत्र बहुत बड़ा और व्यापक (Universal) होता है। इसके नियम पूरी दुनिया पर लागू होते हैं।

​B. क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research):

  • ​कर्ता: यह विद्यालय के शिक्षकों, प्रबंधकों और कर्मचारियों द्वारा किया जाता है (इसके लिए किसी बड़े वैज्ञानिक की ज़रूरत नहीं)।
  • ​उद्देश्य: इसका उद्देश्य कोई नई थ्योरी बनाना नहीं, बल्कि विद्यालय की किसी 'तत्काल समस्या' (Immediate problem) का तुरंत समाधान खोजना है।
  • ​क्षेत्र: इसका क्षेत्र बहुत ही 'सीमित' (Local/स्थानीय) होता है। (अगर आपके स्कूल में बच्चे गणित में फेल हो रहे हैं, तो उसका समाधान सिर्फ आपके स्कूल पर लागू होगा, पूरे भारत के स्कूलों पर नहीं)।

​🔹 3. क्रियात्मक अनुसंधान के मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)

​एक शिक्षक यह अनुसंधान क्यों करता है? इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. ​विद्यालय की कार्यप्रणाली (Working system) में सुधार लाना।
  2. ​विद्यालय की दैनिक समस्याओं (Daily problems) का वैज्ञानिक ढंग से समाधान करना।
  3. ​शिक्षकों और प्रधानाचार्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific attitude) का विकास करना।
  4. ​छात्रों की सीखने की कमियों (Learning gaps) को दूर करना।
  5. ​स्कूल के वातावरण को प्रजातांत्रिक और बेहतर बनाना।




​🔹 4. क्रियात्मक अनुसंधान की प्रमुख विशेषताएँ (Characteristics)

  1. ​समस्या स्थानीय होती है: इसमें जो भी समस्या ली जाती है, वह उसी स्कूल या उसी कक्षा की होती है।
  2. ​कर्ता ही उपभोक्ता होता है: जो व्यक्ति (शिक्षक) रिसर्च करता है, वही उस रिसर्च के नतीजों का उपयोग (Consume) करता है।
  3. ​तत्काल समाधान: इसमें समस्या का तुरंत (Immediate) समाधान खोजा जाता है।
  4. ​कम समय और कम खर्च: इसमें बहुत अधिक पैसे या सालों के समय की ज़रूरत नहीं होती। यह कुछ दिनों या हफ्तों में पूरा हो जाता है।
  5. ​लचीलापन (Flexibility): इसके नियम बहुत कठोर नहीं होते, शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार इनमें बदलाव कर सकता है।






​🔹 5. क्रियात्मक अनुसंधान के चरण / सोपान (Steps of Action Research)

​UPTET में इसके 'चरणों का क्रम' (Sequence) सीधे तौर पर पूछा जाता है। स्टीफन एम. कोरे ने इसके मुख्य रूप से 6 चरण बताए हैं:

​चरण 1: समस्या की पहचान (Identification of the Problem):

सबसे पहले शिक्षक यह तय करता है कि समस्या क्या है। (उदाहरण: कक्षा 8 के बच्चे अचानक स्कूल से भाग रहे हैं)।

​चरण 2: समस्या का परिभाषीकरण (Defining the Problem):

समस्या को बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में लिखना और उसकी सीमा तय करना। (यह तय करना कि समस्या किस कक्षा की है और कब से हो रही है)।

​चरण 3: समस्या के कारणों का विश्लेषण (Analysis of Causes):

समस्या क्यों हो रही है, इसके कारणों पर विचार करना। (क्या शिक्षक का व्यवहार खराब है? क्या पढ़ाई उबाऊ है? क्या स्कूल की बाउंड्री टूटी है?)

​चरण 4: क्रियात्मक परिकल्पना का निर्माण (Formulation of Action Hypothesis):

'परिकल्पना' (Hypothesis) का अर्थ है समस्या को सुलझाने का 'संभावित उपाय' (Possible solution) सोचना। (जैसे- "शायद खेल-कूद के पीरियड बढ़ाने से बच्चे स्कूल से नहीं भागेंगे")।

​चरण 5: तथ्य संकलन और प्रयोग (Data Collection & Experimentation):

जो उपाय (परिकल्पना) सोचा है, उसे असलियत में कक्षा में लागू करना और बच्चों के व्यवहार का डेटा इकट्ठा करना। (एक हफ्ते तक खेल का पीरियड बढ़ाकर देखना)।

​चरण 6: निष्कर्ष और मूल्यांकन (Conclusion & Evaluation):

अंत में यह जाँचना कि क्या समस्या हल हुई? क्या बच्चे स्कूल से भागना बंद हुए? यदि हाँ, तो समाधान सफल रहा।





​🔹 6. क्रियात्मक अनुसंधान के महत्वपूर्ण क्षेत्र (Areas of Action Research)

​शिक्षक किन-किन विषयों पर यह अनुसंधान कर सकता है?

  • ​शिक्षण विधियों की समस्या: बच्चों को कौन सी विधि से गणित समझ आएगा?
  • ​अनुशासनहीनता की समस्या: बच्चे कक्षा में शोर क्यों मचाते हैं?
  • ​परीक्षा से जुड़ी समस्या: बच्चे परीक्षा के समय नकल क्यों करते हैं?
  • ​शारीरिक व मानसिक समस्या: बच्चे स्कूल में मिड-डे मील (Mid-day meal) क्यों नहीं खा रहे?
  • ​स्कूल प्रबंधन: स्कूल में लेट आने वाले शिक्षकों या बच्चों की समस्या।



​🔹 7. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)

​UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ सीधे और सटीक बिंदु जिन्हें आपको बिल्कुल रट लेना है:

  • ​शिक्षा में क्रियात्मक अनुसंधान का जनक: स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey)।
  • ​क्रियात्मक अनुसंधान का मुख्य नारा (Slogan): "समस्या हमारी और समाधान भी हमारा" (Problem is ours and solution is also ours)।
  • ​तत्काल समाधान (Immediate Solution): क्रियात्मक अनुसंधान का सबसे मुख्य लक्ष्य किसी समस्या का तुरंत समाधान खोजना है।
  • ​सिद्धांत निर्माण नहीं होता: क्रियात्मक अनुसंधान में कोई भी 'सार्वभौमिक सिद्धांत' (Universal Theory) या नियम नहीं बनाया जाता, जो पूरी दुनिया पर लागू हो। यह केवल स्थानीय स्कूल के लिए होता है।
  • ​परिकल्पना (Hypothesis) क्या है? समस्या का पूर्व-अनुमानित (पहले से सोचा गया) समाधान ही परिकल्पना है।
  • ​शोधकर्ता कौन है? इसमें शोधकर्ता कोई वैज्ञानिक नहीं, बल्कि विद्यालय का 'शिक्षक', 'प्रधानाचार्य' या 'प्रबंधक' होता है।





​निष्कर्ष (Conclusion): क्रियात्मक अनुसंधान एक शिक्षक के लिए वह 'जादुई छड़ी' है, जिससे वह अपनी कक्षा की हर छोटी-बड़ी समस्या को बिना किसी बाहरी मदद के वैज्ञानिक तरीके से सुलझा सकता है। जब शिक्षक खुद अपनी समस्याओं का हल खोजता है, तो न केवल बच्चों का भला होता है, बल्कि शिक्षक का अपना मानसिक और व्यावसायिक विकास (Professional growth) भी तेज़ी से होता है।


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