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UPTET/CTET 2026 बाल विकास Chapter 10: अधिगम का मूल्यांकन (Assessment of Learning) | SK SACHIN CLASSES

 


​🌟 UPTET & CTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 10 - अधिगम का मूल्यांकन (विस्तृत नोट्स) 🌟







​दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास (CDP) सीरीज़ में आपका स्वागत है।

​आज हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण अध्याय— "अधिगम का मूल्यांकन" (Assessment of Learning) पर चर्चा करेंगे। एक शिक्षक केवल पढ़ाकर अपना काम खत्म नहीं कर सकता; उसे यह भी जाँचना होता है कि बच्चे ने कितना सीखा, कहाँ कमी रह गई और उसे कैसे सुधारा जाए। इसी जाँचने की प्रक्रिया को हम 'मूल्यांकन' कहते हैं।

​आइए, परीक्षा की दृष्टि से इसके सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को बहुत ही सरल भाषा में समझते हैं।





​🔹 1. मापन, आकलन और मूल्यांकन में अंतर (Measurement, Assessment & Evaluation)

​अक्सर हम इन तीनों शब्दों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन मनोविज्ञान में इनमें बहुत बड़ा अंतर है। परीक्षा में यहाँ से सीधे प्रश्न बनते हैं:

A. मापन (Measurement):

  • ​मापन का अर्थ है किसी वस्तु या गुण को 'अंकों' (Numbers) या मात्रा में व्यक्त करना।
  • ​यह केवल मात्रात्मक (Quantitative) होता है।
  • उदाहरण: राम ने गणित में 100 में से 80 अंक प्राप्त किए। (यह केवल मापन है, यह नहीं बताता कि 80 अंक अच्छे हैं या बुरे)।

B. आकलन (Assessment):

  • ​आकलन एक प्रक्रिया है जो 'सीखने-सिखाने' के दौरान चलती है।
  • ​इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की कमियों (Learning Gaps) को पहचानना और उनमें सुधार करना है।
  • ​यह मात्रात्मक और गुणात्मक (Qualitative) दोनों हो सकता है।

C. मूल्यांकन (Evaluation):

  • ​मूल्यांकन सबसे व्यापक शब्द है। यह एक 'निर्णयात्मक' (Judgmental) प्रक्रिया है।
  • ​इसमें मापन और आकलन दोनों शामिल होते हैं।
  • ​इसका उद्देश्य यह तय करना है कि शिक्षा के उद्देश्य किस हद तक पूरे हुए हैं और बच्चे को पास किया जाए या फेल।
  • सूत्र: मूल्यांकन = मापन (मात्रात्मक) + आकलन (गुणात्मक) + मूल्य निर्धारण (Value Judgment)।






​🔹 2. आकलन के मुख्य प्रकार (Types of Assessment)

​UPTET और CTET के लिए यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है (इसे 'Assessment Paradigms' कहते हैं):

1. अधिगम के लिए आकलन (Assessment FOR Learning):

  • ​यह 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment) है।
  • ​यह शिक्षण प्रक्रिया के दौरान (During teaching) किया जाता है।
  • उद्देश्य: बच्चों की कमियों को ढूँढना और उसी समय सुधार (Feedback) करना।
  • उदाहरण: पढ़ाते समय बीच-बीच में बच्चों से प्रश्न पूछना, या खाना बनाते समय बावर्ची (Chef) का खाना चखना।

2. अधिगम का आकलन (Assessment OF Learning):

  • ​यह 'योगात्मक आकलन' (Summative Assessment) है।
  • ​यह शिक्षण प्रक्रिया के अंत में (At the end) किया जाता है।
  • उद्देश्य: बच्चे को ग्रेड (Grade), अंक देना या पास/फेल करना।
  • उदाहरण: वार्षिक या छमाही परीक्षाएं (Yearly Exams)।

3. अधिगम के रूप में आकलन (Assessment AS Learning):

  • ​यह 'स्व-आकलन' (Self-Assessment) है।
  • ​इसमें बच्चा खुद अपना या अपने सहपाठी (Peer) का आकलन करता है।
  • उदाहरण: परीक्षा के बाद बच्चे का खुद अपनी आंसर-शीट चेक करके यह देखना कि उसने कहाँ गलती की।







​🔹 3. सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous & Comprehensive Evaluation)

​भारत में 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE Act 2009) और CBSE ने CCE को लागू किया था। इसका उद्देश्य बच्चों को परीक्षा के डर से मुक्त करना और उनका चहुंमुखी विकास करना है।

A. सतत (Continuous):

इसका अर्थ है कि मूल्यांकन साल के अंत में केवल एक बार नहीं होना चाहिए, बल्कि यह पूरे साल 'लगातार' चलना चाहिए (Unit tests, daily observation)।

B. व्यापक (Comprehensive):

इसका अर्थ है कि मूल्यांकन केवल किताबी ज्ञान (शैक्षिक) का नहीं, बल्कि बच्चे के पूरे व्यक्तित्व का होना चाहिए।

  • शैक्षिक पक्ष (Scholastic): गणित, विज्ञान, भाषा आदि (दिमागी ज्ञान)।
  • सह-शैक्षिक पक्ष (Co-scholastic): खेलकूद, कला, संगीत, अनुशासन, और व्यवहार।







​🔹 4. एक अच्छे परीक्षण की विशेषताएँ (Characteristics of a Good Test)

​UPTET में सीधा प्रश्न आता है कि एक अच्छे प्रश्नपत्र (Test) में क्या गुण होने चाहिए:

1. वैधता (Validity):

कोई परीक्षण जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया है, यदि वह उसी चीज़ को मापता है, तो वह 'वैध' है। (उदाहरण: यदि गणित का टेस्ट है, तो उसमें इतिहास के प्रश्न नहीं होने चाहिए)।

2. विश्वसनीयता (Reliability):

यदि किसी बच्चे की कॉपी को बार-बार चेक किया जाए या अलग-अलग शिक्षकों द्वारा चेक किया जाए, और हर बार उसके 'अंक समान' (Consistent) आएं, तो परीक्षण 'विश्वसनीय' है।

3. वस्तुनिष्ठता (Objectivity):

परीक्षण पर परीक्षक (चेक करने वाले) के मूड, भावनाओं या पक्षपात का कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। (बहुविकल्पीय प्रश्न / MCQs सबसे अधिक वस्तुनिष्ठ होते हैं)।

4. व्यावहारिकता (Usability/Practicability):

परीक्षण ऐसा होना चाहिए जिसे आसानी से लागू किया जा सके (समय, पैसे और मेहनत की बचत हो)।






​🔹 5. मूल्यांकन की प्रमुख तकनीकें (Assessment Tools & Techniques)

​बच्चों के व्यवहार और सीखने को रिकॉर्ड करने के लिए शिक्षक कई उपकरणों का प्रयोग करते हैं:

A. पोर्टफोलियो (Portfolio):

यह एक फाइल या फोल्डर होता है जिसमें बच्चे के पूरे साल भर के 'सर्वश्रेष्ठ कार्यों' (Best works) का कलेक्शन रखा जाता है। इससे बच्चे की प्रगति (Progress) का क्रमिक विकास पता चलता है।

B. एनेकडोटल रिकॉर्ड (Anecdotal Record / दृष्टांत वर्णन):

इसमें बच्चे के जीवन की किसी 'विशिष्ट घटना' (Specific incident) या व्यवहार का लिखित विवरण रखा जाता है। (जैसे- किसी दिन बच्चे ने किसी की मदद की या किसी से झगड़ा किया, तो शिक्षक उसे अपनी डायरी में लिख लेता है)।

C. रुब्रिक्स (Rubrics):

यह स्कोरिंग करने की एक गाइड (Scoring Guide) है। इसमें पहले से नियम लिखे होते हैं कि किस काम के लिए कितने अंक या ग्रेड दिए जाएंगे।

D. रेटिंग स्केल (Rating Scale):

बच्चे के किसी गुण को एक स्केल पर जाँचना (जैसे- बहुत अच्छा, अच्छा, औसत, खराब)।






​🔹 6. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)

​UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ डायरेक्ट पॉइंट्स (Direct Points) जिन्हें आपको कंठस्थ कर लेना है:

  • निदानात्मक परीक्षण (Diagnostic Test): इसका उद्देश्य बच्चे की 'सीखने की कठिनाइयों' या 'कमियों के कारणों' का पता लगाना है। (बीमारी का पता लगाना)।
  • उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching): कमियों का पता लगाने के बाद उन कमियों को दूर करने के लिए जो शिक्षण दिया जाता है, उसे उपचारात्मक शिक्षण कहते हैं। (बीमारी का इलाज करना)।
  • खुले अंत वाले प्रश्न (Open-ended Questions): ऐसे प्रश्न जिनके एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं (जैसे- यदि सूरज न निकले तो क्या होगा?)। ये 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
  • बंद अंत वाले प्रश्न (Closed-ended Questions): ऐसे प्रश्न जिनका केवल एक ही फिक्स उत्तर होता है (जैसे- भारत की राजधानी क्या है?)। ये 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) को दर्शाते हैं।
  • पोर्टफोलियो का महत्व: पोर्टफोलियो बच्चे के आकलन का सबसे प्रामाणिक (Authentic) और विश्वसनीय उपकरण माना जाता है, क्योंकि इसमें बच्चे का अपना खुद का काम होता है।
  • आकलन का मुख्य उद्देश्य: आकलन का उद्देश्य बच्चों को 'पास-फेल' करना या 'लेबल' लगाना (तेज़/गधा) नहीं है, बल्कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार लाना है।

निष्कर्ष (Conclusion): एक डॉक्टर जैसे मरीज़ की बीमारी का पता लगाकर उसका इलाज करता है, ठीक वैसे ही एक शिक्षक मूल्यांकन के ज़रिए बच्चे की कमियों को पहचानता है और उन्हें दूर करता है। मूल्यांकन डराने के लिए नहीं, बल्कि बच्चे को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। एक सही और सकारात्मक फीडबैक बच्चे की पूरी ज़िंदगी बदल सकता है।


अध्याय 9 के लिए यहां क्लिक करें 



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UPTET बाल विकास: अधिगम का मूल्यांकन

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