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UPTET/CTET 2026 बाल विकास Chapter 14: प्रेरणा और अधिगम (Motivation) | SK SACHIN CLASSES

 

​🌟 UPTET & CTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 14 - अभिप्रेरणा और अधिगम (विस्तृत नोट्स) 🌟






​दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास (CDP) सीरीज़ में आज हम एक ऐसा अध्याय पढ़ने जा रहे हैं जो केवल परीक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि हमारी असल ज़िंदगी के लिए भी बहुत ज़रूरी है— अभिप्रेरणा (Motivation)

​बिना प्रेरणा के कोई भी इंसान कुछ नहीं सीख सकता। जैसे गाड़ी को चलने के लिए पेट्रोल की ज़रूरत होती है, वैसे ही सीखने (Learning) के लिए इंसान को 'प्रेरणा' की ज़रूरत होती है। एक शिक्षक का सबसे पहला काम पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ने के लिए 'प्रेरित' करना होता है। आइए, मनोविज्ञान की दृष्टि से इसे गहराई से समझते हैं।

​🔹 1. अभिप्रेरणा (Motivation) का अर्थ और उत्पत्ति

​अंग्रेजी का शब्द 'Motivation' लैटिन भाषा के शब्द 'Movere' (मोवेयर) या 'Motum' से बना है, जिसका अर्थ होता है— "To move" (गति करना या आगे बढ़ना)

​मनोविज्ञान में अभिप्रेरणा एक ऐसी 'आंतरिक शक्ति' (Internal Power) या ऊर्जा है, जो किसी व्यक्ति को तब तक काम करने के लिए मजबूर करती है, जब तक कि वह अपने लक्ष्य (Goal) को प्राप्त न कर ले।

जब आप UPTET पास करने के लिए रात-रात भर जागकर पढ़ाई करते हैं, तो वह 'प्रेरणा' ही है जो आपकी नींद उड़ा देती है।

​🔹 2. अभिप्रेरणा की प्रमुख परिभाषाएँ (Important Definitions)

​UPTET की परीक्षा में मनोवैज्ञानिकों के कथन सीधे तौर पर आते हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें:

1. बी. एफ. स्किनर (B.F. Skinner) के अनुसार:

​"अभिप्रेरणा सीखने का 'सर्वोत्कृष्ट राजमार्ग' (Super highway) है।" (यह UPTET में सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली परिभाषा है)


2. सी. वी. गुड (C.V. Good) के अनुसार:

​"किसी कार्य को आरंभ करने, जारी रखने और उसे नियमित करने की प्रक्रिया को अभिप्रेरणा कहते हैं।"


3. मैकडूगल (McDougall) के अनुसार:

​"अभिप्रेरणा वे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दशाएं हैं जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती हैं।"


4. वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार:

​"अभिप्रेरणा व्यक्ति की वह दशा है जो उसे किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति के लिए निश्चित व्यवहार स्पष्ट करती है।"


​🔹 3. अभिप्रेरणा के प्रकार (Types of Motivation)

​मनोवैज्ञानिकों ने अभिप्रेरणा को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा है:

​A. आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation)

  • ​इसे 'सकारात्मक अभिप्रेरणा' (Positive Motivation) भी कहते हैं।
  • ​जब कोई व्यक्ति किसी काम को अपनी स्वयं की इच्छा (Self-will), खुशी, और रुचि से करता है, तो उसे आंतरिक प्रेरणा कहते हैं।
  • ​इसमें बाहरी ईनाम का कोई लालच नहीं होता।
  • उदाहरण: एक बच्चे का अपनी खुशी के लिए कहानी की किताबें पढ़ना, या किसी वैज्ञानिक का अपने शौक के लिए दिन-रात रिसर्च करना। यह सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रकार की प्रेरणा है।

​B. बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation)

  • ​इसे 'नकारात्मक अभिप्रेरणा' (Negative Motivation) भी कहते हैं।
  • ​जब कोई व्यक्ति किसी काम को अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि बाहरी दबाव, लालच, ईनाम या सज़ा के डर से करता है।
  • उदाहरण: परीक्षा में पास होने पर पिता जी से साइकिल मिलेगी, इस लालच में पढ़ना। या फेल होने पर मार पड़ेगी, इस डर से पढ़ना।
  • ​एक शिक्षक को हमेशा बच्चों को बाह्य प्रेरणा से हटाकर आंतरिक प्रेरणा की ओर ले जाना चाहिए।

​🔹 4. अभिप्रेरणा का चक्र / घटक (Cycle of Motivation)

​हम प्रेरित कैसे होते हैं? इसके पीछे 3 मुख्य घटक काम करते हैं, जिन्हें अभिप्रेरणा का चक्र कहते हैं:

(सूत्र: M = N + D + I)

1. आवश्यकता (Need - N):

हमारे शरीर या मन में किसी चीज़ की 'कमी' होना आवश्यकता कहलाता है। (जैसे- शरीर में पानी की कमी होना = प्यास की आवश्यकता)।

2. अंतर्नोद / चालक (Drive - D):

आवश्यकता के कारण हमारे अंदर जो तनाव या बेचैनी पैदा होती है, उसे चालक (Drive) कहते हैं।

(उदाहरण: शरीर में पानी की कमी (Need) के कारण गला सूखता है, और जो भयंकर 'प्यास' लगती है, वह प्यास हमारा 'चालक' है। चालक ही हमें काम करने के लिए धकेलता है)।

3. प्रोत्साहन / लक्ष्य (Incentive - I):

वह बाहरी वस्तु जिसे प्राप्त करने से हमारा चालक शांत हो जाता है और आवश्यकता पूरी हो जाती है।

(उदाहरण: 'पानी' मिल जाना प्रोत्साहन है। पानी पीते ही प्यास शांत हो जाती है)।

चक्र कैसे चलता है? > आवश्यकता ➔ चालक ➔ लक्ष्य निर्देशित व्यवहार ➔ प्रोत्साहन (लक्ष्य की प्राप्ति) ➔ चालक में कमी।


​🔹 5. अभिप्रेरणा के प्रमुख सिद्धांत (Theories of Motivation)

​UPTET के लिए ये सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण हैं। यहाँ से सीधे प्रश्न छपते हैं:

​🌟 1. अब्राहम मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow's Hierarchy of Needs)

​मास्लो ने 1954 में अपनी पुस्तक 'Motivation and Personality' में यह सिद्धांत दिया। इन्होंने मनुष्य की आवश्यकताओं को एक 'पिरामिड' के रूप में नीचे से ऊपर की ओर 5 स्तरों में बांटा:

  1. शारीरिक आवश्यकताएं (Physiological Needs): सबसे नीचला स्तर। (भोजन, पानी, हवा, नींद, काम/Sex)। जब तक पेट नहीं भरेगा, इंसान कुछ और नहीं सोचता।
  2. सुरक्षा की आवश्यकता (Safety Needs): शरीर और नौकरी की सुरक्षा, पैसा, घर।
  3. प्रेम और लगाव (Love & Belongingness): परिवार, दोस्त, रिश्तेदार, जीवनसाथी का प्यार।
  4. सम्मान की आवश्यकता (Esteem Needs): समाज में रुतबा, पहचान, पद और आत्मविश्वास।
  5. आत्म-सिद्धि (Self-Actualization): सबसे ऊँचा स्तर। व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता (Potential) को पहचान लेता है। यहाँ इंसान केवल दुनिया की भलाई और सत्य की खोज के लिए काम करता है (जैसे- महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद)। मास्लो के अनुसार बहुत कम लोग इस स्तर तक पहुँच पाते हैं।

​🌟 2. विलियम मैकडूगल का मूल प्रवृत्ति सिद्धांत (Instinct Theory)

  • ​मैकडूगल को 'मूल प्रवृत्तियों का जनक' कहा जाता है।
  • ​इन्होंने बताया कि मनुष्य का हर व्यवहार जन्मजात 'मूल प्रवृत्तियों' (Instincts) से जुड़ा होता है।
  • ​इन्होंने कुल 14 मूल प्रवृत्तियां बताईं और कहा कि हर मूल प्रवृत्ति के साथ एक संवेग (Emotion) जुड़ा होता है।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण: * पलायन (भागना) [मूल प्रवृत्ति]भय (डर) [संवेग]
    • युयुत्सा (लड़ने की इच्छा) [मूल प्रवृत्ति]क्रोध (गुस्सा) [संवेग]
    • शिशु रक्षा [मूल प्रवृत्ति]वात्सल्य (प्यार) [संवेग]
    • भोजन अन्वेषण [मूल प्रवृत्ति]भूख [संवेग]

​🌟 3. सिगमंड फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (Psychoanalytic Theory)

  • ​फ्रायड ने अभिप्रेरणा के दो मुख्य कारण बताए— अचेतन मन (Unconscious Mind) और मूल प्रवृत्तियां।
  • ​इन्होंने जीवन की दो मूल प्रवृत्तियां बताईं:
    1. इरोस (Eros): यह 'जीवन मूल प्रवृत्ति' है। यह रचनात्मक और सकारात्मक होती है।
    2. थैनाटोस (Thanatos): यह 'मृत्यु मूल प्रवृत्ति' है। यह विनाशकारी (आक्रामक) और नकारात्मक होती है।

​🌟 4. विक्टर व्रूम का प्रत्याशा सिद्धांत (Vroom's Expectancy Theory)

  • ​इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति तभी किसी काम के लिए प्रेरित होता है, जब उसे उस काम से किसी अच्छे परिणाम की 'प्रत्याशा' (उम्मीद/Expectation) होती है।

​🔹 6. शिक्षा में प्रेरणा का महत्व (Importance in Education)

​एक शिक्षक अपनी कक्षा में बच्चों को कैसे प्रेरित कर सकता है?

  1. रुचि पैदा करना: बच्चों के पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान से जोड़कर पढ़ाएं ताकि उनकी रुचि जगे।
  2. पुरस्कार और दंड: छोटे बच्चों के लिए उचित पुरस्कार (सकारात्मक पुनर्बलन) देना ज़रूरी है, लेकिन दंड से बचना चाहिए।
  3. प्रशंसा (Praise): सही समय पर दी गई 'शाबाशी' बच्चे के आत्मविश्वास को बहुत बढ़ा देती है।
  4. प्रतियोगिता (Competition): बच्चों में स्वस्थ प्रतियोगिता कराना (एक-दूसरे से नहीं, बल्कि खुद के पिछले प्रदर्शन से प्रतियोगिता)।
  5. लक्ष्य की स्पष्टता: बच्चों को यह बताना कि वे जो पढ़ रहे हैं, उसका उनके वास्तविक जीवन में क्या फायदा है।

​🔹 7. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)

​UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ सीधे और सटीक बिंदु जिन्हें आपको बिल्कुल रट लेना है:

  • अभिप्रेरणा का जन्मदाता: अभिप्रेरणा शब्द 'मोवेयर' से बना है।
  • सीखने का स्वर्ण पथ (Golden Road): स्किनर ने अभिप्रेरणा को सीखने का राजमार्ग कहा है।
  • उपलब्धि अभिप्रेरणा सिद्धांत (Achievement Motivation): यह सिद्धांत डेविड मैकलीलैंड (David McClelland) ने दिया था। (इसमें व्यक्ति हर काम को 'परफेक्शन' और सफलता के साथ करना चाहता है)।
  • थॉमसन के अनुसार अभिप्रेरणा के प्रकार: थॉमसन ने अभिप्रेरणा को दो भागों में बांटा— स्वाभाविक (Natural) और कृत्रिम (Artificial)।
  • जन्मजात प्रेरक (Innate Motives): भूख, प्यास, नींद, काम (Sex), मलमूत्र त्याग।
  • अर्जित प्रेरक (Acquired Motives): सामाजिक सम्मान, रुचि, आदत की मजबूरी, जीवन का लक्ष्य।
  • आंतरिक प्रेरणा बनाम बाह्य प्रेरणा: यदि कोई बच्चा परीक्षा इसलिए पढ़ रहा है ताकि उसे ज्ञान मिले, तो यह आंतरिक प्रेरणा है। यदि वह केवल शिक्षक की डांट से बचने के लिए पढ़ रहा है, तो यह बाह्य प्रेरणा है।

निष्कर्ष (Conclusion): एक शिक्षक होने के नाते आपका कर्तव्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं है, बल्कि बच्चों के अंदर एक ऐसी 'आग' (प्रेरणा) जलाना है कि वे जीवन भर खुद सीखने के लिए आतुर रहें। जब आप किसी बच्चे की 'आंतरिक प्रेरणा' को जगा देते हैं, तो वह बच्चा किसी भी मुश्किल लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है।


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