🌟 UPTET & CTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 7 - भाषा और विचार (विस्तृत नोट्स) 🌟
दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास (CDP) सीरीज़ में आज हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक पर चर्चा करेंगे— भाषा और विचार (Language and Thought)।
एक शिक्षक के रूप में यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बच्चों में भाषा का विकास कैसे होता है और भाषा तथा उनके सोचने की क्षमता (विचार) के बीच क्या संबंध है। आइए, इसे बहुत ही आसान और रोचक तरीके से समझते हैं।
🔹 1. भाषा क्या है? (What is Language?)
भाषा हमारे विचारों, भावनाओं और इच्छाओं को दूसरों तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसके बिना मानव समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
भाषा की प्रमुख विशेषताएँ:
- अर्जित संपत्ति (Acquired Property): भाषा जन्मजात नहीं होती (हालाँकि सीखने की क्षमता जन्मजात हो सकती है)। बच्चा जिस समाज या परिवेश में रहता है, वहीं की भाषा को वह 'अर्जित' (Acquire) करता है।
- प्रतीकात्मक (Symbolic): भाषा प्रतीकों और ध्वनियों की एक व्यवस्था है। हर शब्द किसी न किसी वस्तु या भाव का प्रतीक होता है।
- परिवर्तनशील (Dynamic): भाषा कभी स्थिर नहीं रहती। यह समय और स्थान के साथ बदलती रहती है (जैसे- 10 साल पहले की हिंदी और आज की इंटरनेट वाली हिंदी में फर्क है)।
- सामाजिक उपकरण (Social Tool): भाषा समाज के साथ अंतःक्रिया (Interaction) करने का सबसे बड़ा औज़ार है।
🔹 2. विचार क्या है? (What is Thought?)
विचार (Thinking) एक मानसिक या संज्ञानात्मक प्रक्रिया (Cognitive Process) है।
जब भी हमारे सामने कोई समस्या आती है, तो हमारा दिमाग उस समस्या को सुलझाने के लिए जो मानसिक जोड़-तोड़ करता है, उसे ही विचार या चिंतन कहते हैं। यह हमेशा किसी 'लक्ष्य' (Goal) की ओर निर्देशित होता है।
🔹 3. भाषा और विचार में संबंध (Relationship b/w Language & Thought)
(नोट: यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। UPTET और CTET दोनों में यहाँ से मनोवैज्ञानिकों के कथन सीधे पूछे जाते हैं।)
क्या पहले भाषा आई या पहले विचार? इस पर अलग-अलग मनोवैज्ञानिकों के अलग-अलग मत हैं:
A. जीन पियाजे का मत (Jean Piaget's View)
"विचार भाषा से पहले आता है और भाषा को निर्धारित करता है।"
- पियाजे का मानना था कि बच्चे के दिमाग में पहले 'विचार' (Thought) का जन्म होता है। भाषा केवल उन विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है।
- अहंकेन्द्रित वाक् (Egocentric Speech): पियाजे ने कहा कि जब 2 से 7 साल का बच्चा खुद से बातें करता है, तो यह 'अहंकेन्द्रित' भाषण है। पियाजे ने इसे कोई खास महत्व नहीं दिया।
B. लेव वाइगोत्सकी का मत (Lev Vygotsky's View)
"शुरुआत में भाषा और विचार अलग-अलग होते हैं, लेकिन बाद में (लगभग 3 वर्ष की आयु में) वे आपस में मिल जाते हैं।"
- वाइगोत्सकी ने पियाजे का विरोध किया। उनका मानना था कि भाषा हमारे विचारों को 'दिशा' (Direction) देती है।
- निजी भाषण (Private Speech): जब बच्चा कोई काम करते समय खुद से बोल-बोलकर बातें करता है, तो वाइगोत्सकी के अनुसार बच्चा अपने कार्यों को निर्देशित (Guide) कर रहा होता है। उन्होंने इसे संज्ञानात्मक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना।
C. बेंजामिन व्होर्फ का मत (Benjamin Whorf's View)
"भाषा हमारे विचारों को निर्धारित करती है।" (Linguistic Determinism)
- व्होर्फ का मानना था कि हमारी भाषा की संरचना (Structure) ही यह तय करती है कि हम दुनिया को कैसे देखेंगे और कैसे सोचेंगे। इसे 'भाषाई सापेक्षता' (Linguistic Relativity) का सिद्धांत भी कहते हैं।
🔹 4. नोम चोमस्की का भाषा विकास सिद्धांत (Noam Chomsky's Theory)
नोम चोमस्की एक अमेरिकी भाषाविद् हैं। UPTET में भाषा विकास से सबसे ज्यादा प्रश्न चोमस्की से ही आते हैं।
चोमस्की के सिद्धांत के मुख्य बिंदु:
- जन्मजात क्षमता (Innate Ability): चोमस्की का मानना था कि बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता जन्मजात होती है।
- LAD (Language Acquisition Device - भाषा अर्जन यंत्र): चोमस्की ने कहा कि मानव मस्तिष्क में एक काल्पनिक यंत्र होता है जिसे LAD कहते हैं। यह यंत्र बच्चों को जन्म से ही भाषा के नियम (Grammar) सीखने में मदद करता है। यह 5 साल की उम्र तक सबसे ज्यादा सक्रिय (Active) रहता है।
- सार्वभौमिक व्याकरण (Universal Grammar - UG): चोमस्की के अनुसार दुनिया की सभी भाषाओं का मूल व्याकरण एक जैसा है और बच्चा इसे जन्म से ही अपने दिमाग में लेकर आता है।
🔹 5. भाषा विकास की अवस्थाएँ (Stages of Language Development)
एक बच्चा जन्म से लेकर बोलना कैसे सीखता है, इसकी एक निश्चित क्रमबद्ध प्रक्रिया होती है:
1. क्रंदन या रोना (Crying):
जन्म के तुरंत बाद बच्चे की पहली भाषा उसका 'रोना' ही होती है। इसी से वह अपनी तकलीफ बताता है।
2. कूकना (Cooing) - [6 सप्ताह]:
लगभग 6 हफ़्ते (डेढ़ महीने) का बच्चा गले से स्वर (Vowels) जैसी ध्वनियाँ निकालता है, जैसे- "आ आ", "ऊ ऊ"।
3. बबलाना (Babbling) - [6 महीने]:
लगभग 6 महीने का बच्चा व्यंजन और स्वर को मिलाकर एक ही ध्वनि को बार-बार दोहराता है। जैसे- "बा-बा-बा", "मा-मा-मा"।
4. एक-शब्दीय अवस्था (One-word Stage) - [1 वर्ष]:
लगभग 1 साल का बच्चा पूरे वाक्य की जगह केवल एक शब्द बोलकर अपनी बात समझाता है। जैसे- केवल "पानी" बोलना (जिसका मतलब है मुझे पानी चाहिए)।
5. टेलीग्राफिक स्पीच (Telegraphic Speech) या द्वि-शब्दीय अवस्था - [1.5 से 2 वर्ष]:
लगभग 18 से 24 महीने का बच्चा दो-दो शब्दों को जोड़कर छोटे वाक्य बनाना शुरू कर देता है। जैसे- "पापा जाओ", "दूध दो"। इसे टेलीग्राफिक स्पीच कहते हैं।
🔹 6. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)
UPTET की परीक्षा में भाषा की इकाइयों (Units of Language) से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। इन्हें बिल्कुल कंठस्थ कर लें:
- स्वनिम (Phoneme): * यह भाषा की (ध्वनि की) सबसे छोटी इकाई है।
- इसका अपना कोई अर्थ नहीं होता।
- उदाहरण: अ, क, च, प, फ आदि।
- रूपिम (Morpheme): * यह अर्थ की दृष्टि से भाषा की सबसे छोटी इकाई है।
- उदाहरण: 'राम', 'पानी', 'कैट (Cat)'। (अगर 'राम' को तोड़ दें तो 'रा' और 'म' का अपना कोई अर्थ नहीं बचेगा)।
- वाक्य-विन्यास (Syntax): * यह भाषा के 'नियमों' या 'ग्रामर' का ढांचा है। वाक्य व्याकरण के अनुसार सही लिखा होना चाहिए।
- उदाहरण: "मैडम चाय खाती हैं।" (यह वाक्य व्याकरण/Syntax के हिसाब से सही है, क्योंकि कर्ता, कर्म और क्रिया अपनी जगह पर हैं, लेकिन अर्थ गलत है)।
- अर्थ-विज्ञान (Semantics): * वाक्य का अर्थ (Meaning) पूरी तरह से सही और तर्कसंगत होना चाहिए।
- उदाहरण: "मैडम चाय पीती हैं।" (यह वाक्य Syntax और Semantics दोनों के हिसाब से बिल्कुल सही है)।
📌 कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदु (Extra Points):
- बी. एफ. स्किनर (B.F. Skinner): स्किनर एक व्यवहारवादी थे। उनका मानना था कि बच्चे भाषा 'अनुकरण' (Imitation) और 'पुनर्बलन' (Reinforcement) के माध्यम से सीखते हैं। (बच्चा माता-पिता की नकल करता है, और सही बोलने पर उसे शाबाशी मिलती है)।
- लड़कों की तुलना में लड़कियों का भाषा विकास थोड़ा जल्दी होता है।
- एक समृद्ध और खुला वातावरण (Rich Environment) भाषा विकास को सबसे ज्यादा तेज़ी देता है।
निष्कर्ष (Conclusion): एक शिक्षक के रूप में आपको यह समझना होगा कि बच्चे की भाषा का सम्मान करना उसकी सोच और उसके विचारों का सम्मान करना है। कक्षा में बच्चों को अपनी मातृभाषा में बोलने और अपने विचार रखने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए।
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