UPTET Hindi Chapter 8: मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ | 2000+ Words रामबाण नोट्स & 50 PYQ Mock Test (SK SACHIN CLASSES)
⭐ अध्याय 08 : लोकोक्तियों एवं मुहावरों के अर्थ और प्रयोग (UPTET रामबाण महा-एपिसोड) ⭐
SK SACHIN CLASSES स्पेशल: भावी शिक्षकों! हिंदी भाषा को प्रभावशाली, आकर्षक और चमत्कारिक बनाने के लिए 'मुहावरों' और 'लोकोक्तियों' का प्रयोग किया जाता है। इनके प्रयोग से भाषा में जान आ जाती है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET और CTET) में मुहावरों और लोकोक्तियों के अर्थ पहचानने से संबंधित 2 से 3 प्रश्न (PYQ) निश्चित रूप से हर साल पूछे जाते हैं।
इस विस्तृत और 2000+ शब्दों के 'रामबाण' लेख में हम मुहावरे और लोकोक्ति के बीच का वह सूक्ष्म अंतर समझेंगे जहाँ अक्सर छात्र गलती करते हैं, और साथ ही UPTET के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुहावरों और लोकोक्तियों का विस्तृत संग्रह भी देखेंगे।
⭐ भाग 1: मुहावरा (Idiom) का विस्तृत अध्ययन
मुहावरा का अर्थ: 'मुहावरा' मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है- 'अभ्यास होना' या 'आदी होना'।
- ⭐ परिभाषा: जब कोई शब्द-समूह (वाक्यांश) अपने सामान्य अर्थ (शाब्दिक अर्थ) को छोड़कर किसी विशेष अर्थ (लाक्षणिक अर्थ) को प्रकट करने लगता है, तो उसे मुहावरा कहते हैं।
- ⭐ विशेषताएँ (UPTET रामबाण तथ्य):
- मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता, यह केवल एक वाक्यांश (Phrase) होता है। इसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं किया जा सकता; यह हमेशा वाक्य के बीच में जुड़कर आता है।
- मुहावरे के अंत में प्रायः 'ना' शब्द आता है। (जैसे- आँख मारना, नौ दो ग्यारह होना)।
- मुहावरे का सीधा अर्थ नहीं लिया जाता, बल्कि इसके पीछे का भावार्थ (लक्षणा शक्ति) समझा जाता है। (जैसे- 'गधे को बाप बनाना' का अर्थ किसी जानवर को पिता बनाना नहीं, बल्कि मूर्ख की खुशामद करना है)।
- मुहावरे में लिंग, वचन और काल के अनुसार थोड़ा बहुत परिवर्तन (विकार) हो सकता है।
⭐ भाग 2: लोकोक्ति / कहावत (Proverb) का विस्तृत अध्ययन
लोकोक्ति का अर्थ: 'लोकोक्ति' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- 'लोक' + 'उक्ति' (अर्थात लोक या समाज में प्रचलित उक्ति/कथन)। इसे सामान्य बोलचाल में 'क कहावत' भी कहा जाता है।
- ⭐ परिभाषा: समाज के लंबे अनुभव के आधार पर जो कथन या वाक्य लोगों की ज़ुबान पर चढ़ जाते हैं और किसी बात का समर्थन, खंडन या उपदेश देने के लिए प्रयोग होते हैं, उन्हें लोकोक्ति कहते हैं।
- ⭐ विशेषताएँ (UPTET रामबाण तथ्य):
- लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य (Complete Sentence) होती है। इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया जा सकता है।
- लोकोक्ति के अंत में प्रायः 'ना' नहीं आता है।
- लोकोक्ति का रूप कभी नहीं बदलता है (यह अविकारी होती है)। इसे ज्यों का त्यों वाक्य के अंत में या स्वतंत्र रूप से बोला जाता है।
⭐ भाग 3: मुहावरे और लोकोक्ति में मुख्य अंतर (Difference)
UPTET की परीक्षा में कथन-कारण वाले प्रश्नों में यह अंतर बहुत पूछा जाता है:
|
बिंदु (Point) |
मुहावरा (Idiom) |
लोकोक्ति (Proverb) |
|---|---|---|
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स्वरूप |
यह एक वाक्यांश (वाक्य का अंश) होता है। |
यह एक पूर्ण वाक्य होती है। |
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प्रयोग |
इसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता। |
इसका स्वतंत्र प्रयोग हो सकता है। |
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परिवर्तन |
इसमें काल/लिंग के अनुसार परिवर्तन हो जाता है। |
इसका स्वरूप कभी नहीं बदलता है (ज्यों का त्यों रहता है)। |
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अंत |
इसके अंत में प्रायः 'ना' लगा होता है। |
इसके अंत में 'ना' का होना ज़रूरी नहीं है। |
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उद्देश्य |
यह भाषा में चमत्कार और प्रवाह लाता है। |
यह |
⭐ भाग 4: UPTET / CTET के लिए अति-महत्वपूर्ण मुहावरे (PYQ संग्रह)
- अँधे की लकड़ी / लाठी: एकमात्र सहारा। (श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए अँधे की लकड़ी था।)
- अकल पर पत्थर पड़ना: बुद्धि भ्रष्ट हो जाना। (रावण की अकल पर पत्थर पड़ गए थे जो उसने सीता का हरण किया।)
- अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना: अपनी प्रशंसा (तारीफ) स्वयं करना।
- आग बबूला होना: बहुत अधिक क्रोधित होना।
- आस्तीन का साँप: कपटी मित्र / धोखेबाज़ दोस्त। (उस पर भरोसा मत करना, वह तो आस्तीन का साँप है।)
- आसमान सिर पर उठाना: बहुत अधिक शोर करना।
- ईंट से ईंट बजाना: पूरी तरह से नष्ट कर देना / विनाश करना।
- ईद का चाँद होना: बहुत दिनों बाद दिखाई देना।
- ऊँट के मुँह में जीरा: आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना।
- एक पंथ दो काज: एक साथ दो लाभ प्राप्त होना।
- गूलर का फूल होना: दुर्लभ वस्तु होना / दिखाई न देना।
- घी के दीए जलाना: अत्यधिक खुशियाँ मनाना। (राम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने घी के दीए जलाए।)
- छक्के छुड़ाना: बुरी तरह से हरा देना। (भारतीय सेना ने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए।)
- छाती पर मूँग दलना: पास रहकर बहुत दुःख देना।
- टेढ़ी खीर होना: बहुत कठिन कार्य होना। (UPTET पास करना अब टेढ़ी खीर नहीं है, यदि 'SK SACHIN CLASSES' से पढ़ा जाए।)
- तारे गिनना: रात में नींद न आना / बेचैनी से रात काटना।
- नौ दो ग्यारह होना: चुपचाप भाग जाना / भाग खड़ा होना। (पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गए।)
- पानी-पानी होना: बहुत अधिक लज्जित (शर्मिंदा) होना।
- मुँह में पानी आना: लालच आना।
- लोहे के चने चबाना: बहुत कठिन संघर्ष करना / बहुत मुश्किल काम करना।
- हाथ पाँव फूल जाना: घबरा जाना / डर जाना।
- हवा से बातें करना: बहुत तेज़ दौड़ना। (महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक हवा से बातें करता था।)
- श्रीगणेश करना: कार्य का शुभारंभ करना।
- इतिश्री होना: कार्य समाप्त होना।
- कलई खुलना: भेद या रहस्य प्रकट हो जाना।
⭐ भाग 5: UPTET / CTET के लिए अति-महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ (PYQ संग्रह)
- अधजल गगरी छलकत जाय: कम ज्ञान या संपत्ति वाले व्यक्ति का बहुत अधिक दिखावा (अहंकार) करना।
- अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत: समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ (बेकार) है।
- आम के आम, गुठलियों के दाम: दोहरा लाभ (Double profit) प्राप्त होना।
- उल्टा चोर कोतवाल को डांटे: अपना अपराध स्वीकार न करके उल्टा पूछने वाले (निर्दोष) को ही दोषी ठहराना।
- ऊँची दुकान, फीका पकवान: केवल बाहरी दिखावा अधिक होना, वास्तविकता में कुछ न होना।
- एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं: एक स्थान पर दो समान अधिकार वाले या दो शक्तिशाली व्यक्ति नहीं रह सकते।
- कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली: दो असमान व्यक्तियों की तुलना करना (एक बहुत बड़ा और एक बहुत छोटा)।
- काला अक्षर भैंस बराबर: बिल्कुल अनपढ़ या निरक्षर होना।
- खोदा पहाड़, निकली चुहिया: बहुत अधिक कठिन परिश्रम करने पर भी बहुत थोड़ा सा (मामूली) लाभ प्राप्त होना।
- घर का भेदी लंका ढाए: आपस की फूट या घर के व्यक्ति की गद्दारी से बहुत बड़ा विनाश होता है।
- चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए: बहुत अधिक कंजूस व्यक्ति होना।
- चिराग तले अँधेरा: दूसरों को उपदेश देने वाले व्यक्ति के स्वयं के घर (या आचरण) में बुराई का होना।
- जल में रहकर मगर से बैर: अपने आश्रयदाता (जिसके सहारे रह रहे हों) से ही दुश्मनी मोल लेना।
- जिसकी लाठी, उसकी भैंस: शक्तिशाली व्यक्ति की ही हमेशा विजय होती है।
- डूबते को तिनके का सहारा: घोर संकट या विपत्ति के समय में प्राप्त होने वाली थोड़ी सी मदद भी बहुत बड़ी लगती है।
- नाच न जाने आँगन टेढ़ा: स्वयं को काम करना न आने पर दूसरों को या साधनों को दोष देना।
- नौ नकद, न तेरह उधार: भविष्य की बड़ी आशा से वर्तमान का थोड़ा सा नकद लाभ भी अधिक अच्छा होता है।
- बंदर क्या जाने अदरक (अथवा स्वाद) का स्वाद: मूर्ख या गुणहीन व्यक्ति किसी अच्छी वस्तु की कद्र (महत्व) नहीं जानता।
- मुँह में राम, बगल में छुरी: ऊपर से मीठी-मीठी बातें करना और अंदर से कपट (धोखा) रखना।
- सावन सूखे न भादों हरे: जो व्यक्ति हमेशा (सुख-दुःख में) एक समान स्थिति में रहता है।
मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ (अध्याय 08)
- 📝 कुल प्रश्न : 50
- ✅ सही उत्तर : 0
- ❌ गलत उत्तर : 0
- 📊 Accuracy : 0%
- ⏱️ Time Taken : 00:00

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