🌟 UPTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 19 - ध्यान (अवधान), रुचि और आदत (विस्तृत नोट्स) 🌟
दोस्तों, SK SACHIN CLASSES की बाल विकास (CDP) सीरीज़ में आज हम मनोविज्ञान के तीन ऐसे स्तंभों पर चर्चा करेंगे जिनके बिना सीखना (Learning) बिल्कुल असंभव है— ध्यान (Attention), रुचि (Interest) और आदत (Habit)।
कक्षा में यदि बच्चे का 'ध्यान' नहीं है, तो शिक्षक चाहे कितना भी अच्छा पढ़ा ले, बच्चा कुछ नहीं सीखेगा। ध्यान लगाने के लिए बच्चे में 'रुचि' का होना ज़रूरी है, और जब कोई काम बार-बार किया जाता है, तो वह 'आदत' बन जाता है। UPTET की परीक्षा में इन तीनों के आपसी संबंध और मनोवैज्ञानिकों की परिभाषाओं से पक्के प्रश्न आते हैं। आइए, इन्हें गहराई से समझते हैं।
🔹 1. ध्यान या अवधान (Attention) का अर्थ
मनोविज्ञान की भाषा में ध्यान को 'अवधान' कहा जाता है।
हमारे चारों ओर हर समय हज़ारों चीज़ें होती रहती हैं (हवा की आवाज़, गाड़ियों का शोर, लोगों का चलना), लेकिन हमारा दिमाग उन सब को छोड़कर किसी 'एक ही वस्तु या विचार' पर केंद्रित हो जाता है।
अर्थ: "अपनी चेतना (Consciousness) को किसी एक वस्तु या विचार पर केंद्रित करना और बाकी सभी चीज़ों को मस्तिष्क से हटा देना ही ध्यान (अवधान) कहलाता है।"
UPTET के लिए महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (इन्हें रट लें):
1. डमविल (Dumville) के अनुसार:
"किसी दूसरी वस्तु की बजाय, केवल एक ही वस्तु पर चेतना का केंद्रीकरण अवधान (ध्यान) है।" (यह UPTET में सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली परिभाषा है)
2. रॉस (Ross) के अनुसार:
"अवधान विचार की वस्तु को मस्तिष्क के सामने स्पष्ट रूप से उपस्थित करने की प्रक्रिया है।"
3. वैलेंटाइन (Valentine) के अनुसार:
"अवधान मस्तिष्क की वह शक्ति है जो उसे किसी एक ही बात पर लगाए रखती है।"
🔹 2. ध्यान (अवधान) के प्रकार (Types of Attention)
मनोवैज्ञानिक रॉस (Ross) ने ध्यान को मुख्य रूप से 2 भागों में बांटा है:
A. ऐच्छिक अवधान (Voluntary Attention)
- जब हम अपनी 'इच्छा' (Will) से जानबूझकर और प्रयास करके किसी चीज़ पर ध्यान लगाते हैं।
- इसमें हमें मेहनत करनी पड़ती है।
- उदाहरण: परीक्षा के समय गणित के कठिन सवालों को समझने के लिए ज़बरदस्ती अपना ध्यान किताब पर लगाना।
B. अनैच्छिक अवधान (Involuntary Attention)
- जब हमारा ध्यान बिना किसी प्रयास के, अपने आप (अचानक) किसी चीज़ की ओर खिंच जाता है।
- इसमें इच्छा या मेहनत की कोई ज़रूरत नहीं होती।
- उदाहरण: पढ़ाई करते समय अचानक बाहर डीजे (DJ) या तेज़ गाने की आवाज़ आने पर ध्यान का अपने आप उस तरफ चले जाना।
🔹 3. ध्यान को प्रभावित करने वाले कारक (Factors of Attention)
हमारा ध्यान किसी चीज़ पर क्यों जाता है? इसके 2 मुख्य कारण (निर्धारक) होते हैं:
1. बाह्य कारक / वस्तुनिष्ठ कारक (External Factors):
ये वो कारण हैं जो वस्तु के अंदर होते हैं, जो हमारा ध्यान अपनी ओर खींचते हैं:
- आकार (Size): बहुत बड़ी या बहुत छोटी चीज़ (जैसे- अख़बार में बहुत बड़ी हेडिंग)।
- तीव्रता (Intensity): बहुत तेज़ रोशनी या बहुत तेज़ आवाज़।
- गति (Movement): रुकी हुई चीज़ों की तुलना में चलती हुई चीज़ें (जैसे- विज्ञापन वाले हिलते हुए बोर्ड)।
- नवीनता (Novelty): कोई बिल्कुल नई या अनोखी चीज़।
- पुनरावृत्ति (Repetition): किसी बात को बार-बार दोहराना (जैसे- गली में फेरी वाले की आवाज़)।
2. आंतरिक कारक / व्यक्तिनिष्ठ कारक (Internal Factors):
ये वो कारण हैं जो व्यक्ति के खुद के अंदर होते हैं:
- रुचि (Interest): जिस काम में हमें मज़ा आता है, वहाँ ध्यान अपने आप लग जाता है। (रुचि ध्यान की जननी है)।
- आवश्यकता (Need): भूखे व्यक्ति का ध्यान हमेशा खाने की दुकानों पर ही जाएगा।
- लक्ष्य (Goal): अगर आपका लक्ष्य UPTET है, तो आपका ध्यान अपने आप SK SACHIN CLASSES के नोट्स पर आ जाएगा।
- आदत (Habit): जिसे सुबह जल्दी उठकर चाय पीने की आदत है, उसका ध्यान सुबह होते ही चाय पर जाएगा।
🔹 4. रुचि (Interest) का अर्थ और परिभाषाएँ
'Interest' शब्द लैटिन भाषा के शब्द 'Interesse' (इन्टेरेस) से बना है, जिसका अर्थ होता है 'अंतर करना' या 'महत्वपूर्ण होना'।
"वह प्रेरक शक्ति जो हमें किसी व्यक्ति, वस्तु या क्रिया की ओर ध्यान देने के लिए बाध्य करती है, रुचि कहलाती है।" जब हमें किसी चीज़ में मज़ा आता है और हम उसे बार-बार करना चाहते हैं, तो वह हमारी रुचि है।
UPTET के लिए अति-महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
1. मैकडूगल (McDougall) के अनुसार - [रामबाण तथ्य]:
"रुचि प्रच्छन्न (छिपा हुआ) अवधान है, और अवधान रुचि का क्रियात्मक रूप है।" (Interest is latent attention, and attention is interest in action.)
2. क्रो एवं क्रो (Crow & Crow) के अनुसार:
"रुचि वह प्रेरक शक्ति है जो हमें किसी व्यक्ति, वस्तु या क्रिया के प्रति ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।"
3. बिंघम (Bingham) के अनुसार:
"रुचि किसी अनुभव में लीन होने और उसे जारी रखने की प्रवृत्ति है।"
🔹 5. रुचि के प्रकार (Types of Interest)
सुपर (Super) और अन्य मनोवैज्ञानिकों ने रुचि को मुख्य रूप से 2 भागों में बांटा है:
A. जन्मजात रुचि (Innate / Natural Interest):
- जो रुचियाँ व्यक्ति में जन्म से होती हैं (मूल प्रवृत्तियों से जुड़ी)।
- उदाहरण: बच्चों का खेलने में रुचि लेना, खाने में रुचि, या माँ का बच्चे से प्यार करने में रुचि।
B. अर्जित रुचि (Acquired Interest):
- जो रुचियाँ हम जन्म के बाद समाज, परिवार या वातावरण से सीखते हैं।
- उदाहरण: क्रिकेट खेलने में रुचि, संगीत सुनने में रुचि, किताबें पढ़ने में रुचि।
🔹 6. आदत (Habit) का अर्थ और परिभाषाएँ
"जब हम किसी काम को बार-बार (अभ्यास) करते हैं, तो वह काम इतना आसान हो जाता है कि उसे करने के लिए हमें दिमाग लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती; वह हमारी 'आदत' बन जाता है।"
आदत सीखे हुए व्यवहार का स्वतः (Automatic) रूप है।
UPTET के लिए महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
1. विलियम जेम्स (William James) के अनुसार - [सबसे महत्वपूर्ण]:
"आदत दूसरा स्वभाव है, जो सामान्य स्वभाव से दस गुना अधिक शक्तिशाली होता है।" (Habit is second nature.)
2. गैरेट (Garrett) के अनुसार:
"आदत उस व्यवहार का नाम है जो इतनी बार दोहराया गया है कि वह यंत्रवत (मशीन की तरह) हो गया है।"
3. रायबर्न (Ryburn) के अनुसार:
"आदत एक सीखा हुआ व्यवहार है जो स्वचालित (Automatic) हो गया है।"
🔹 7. आदतों के प्रकार और निर्माण (Formation of Habits)
आदतों के प्रकार:
- शारीरिक आदतें (Motor Habits): जैसे- चलना, कपड़े पहनना, टाइपिंग करना।
- मानसिक आदतें (Mental Habits): सोचने का तरीका, हमेशा सकारात्मक सोचना।
- नैतिक आदतें (Moral Habits): हमेशा सच बोलना, बड़ों का सम्मान करना, समय का पालन करना।
आदत का निर्माण कैसे करें? (वैलेंटाइन के नियम):
वैलेंटाइन ने अच्छी आदतें डालने के 3 नियम बताए:
- दृढ़ संकल्प (Firm Determination): जो नई आदत डालनी है, उसका पक्का इरादा करें।
- निरंतरता (Continuity): आदत बनने तक उस काम को एक भी दिन न छोड़ें। लगातार अभ्यास करें।
- सही वातावरण (Favorable Environment): वैसे ही लोगों के साथ रहें जो वैसी आदतें रखते हों।
🔹 8. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)
UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ सीधे और सटीक बिंदु जिन्हें आपको बिल्कुल रट लेना है:
- ध्यान और रुचि (Attention & Interest): ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। (मैकडूगल का कथन)। जहाँ रुचि होगी, वहाँ ध्यान अपने आप चला जाएगा।
- 'अवधान' एक मानसिक प्रक्रिया है जो पूरी तरह से 'चयनात्मक' (Selective) होती है। (हम बहुत सी चीज़ों में से किसी एक को चुनते हैं)।
- आदतें कभी भी जन्मजात नहीं होतीं; आदतें हमेशा 'अर्जित' (Acquired) की जाती हैं।
- एक शिक्षक को कक्षा में बच्चों का ध्यान खींचने के लिए शिक्षण विधियों में 'नवीनता' (नयापन) और 'दृश्य-श्रव्य सामग्री' (TLM) का प्रयोग करना चाहिए।
- 'रुचि प्रच्छन्न ध्यान है' — यह कथन मैकडूगल का है।
- 'आदत दूसरा स्वभाव है' — यह कथन विलियम जेम्स का है।
निष्कर्ष (Conclusion): ध्यान, रुचि और आदत शिक्षा के तीन सबसे मज़बूत स्तंभ हैं। एक शिक्षक का कर्तव्य है कि वह पहले विषय में बच्चों की 'रुचि' पैदा करे, जिससे बच्चों का 'ध्यान' पढ़ाई पर लगे, और फिर लगातार अभ्यास करवाकर पढ़ाई को बच्चों की 'आदत' बना दे। जो बच्चा पढ़ाई को अपनी आदत बना लेता है, उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
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