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UPTET 2026 पर्यावरण अध्ययन (EVS) Chapter 3: आश्रय और आवास (Shelter) | SK SACHIN CLASSES

 

​🌟 UPTET 2026: पर्यावरण अध्ययन (EVS) अध्याय 3 - आश्रय एवं आवास (विस्तृत नोट्स) 🌟





​दोस्तों, SK SACHIN CLASSES के पर्यावरण अध्ययन (EVS) सीरीज़ में आपका एक बार फिर से स्वागत है।

​आज हम EVS का एक बहुत ही रोचक और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय पढ़ने जा रहे हैं— "आश्रय/आवास (Shelter)"

चाहे इंसान हो, जानवर हो या कोई नन्हा सा पक्षी, हर जीव को खराब मौसम (सर्दी, गर्मी, बारिश) और शत्रुओं से बचने के लिए एक सुरक्षित 'घर' या आश्रय की आवश्यकता होती है। UPTET की परीक्षा में भारत के अलग-अलग राज्यों (जैसे असम, राजस्थान, कश्मीर) में बनाए जाने वाले विशेष घरों और पक्षियों के अजीबोगरीब घोंसलों से सीधे प्रश्न छपते हैं। आइए, इन्हें विस्तार से समझते हैं।





​🔹 1. आश्रय (आवास) का अर्थ और महत्व

अर्थ: वह स्थान जहाँ कोई जीव जंतु या मनुष्य रहता है, उसे उसका आश्रय या आवास (घर) कहा जाता है।

महत्व: 1. यह हमें खराब मौसम (कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी और तेज़ बारिश) से बचाता है।

2. यह हमें जंगली जानवरों और शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है।

3. यह परिवार को एक साथ रहने और बच्चों का पालन-पोषण करने का स्थान देता है।



​🔹 2. विभिन्न जीव-जंतुओं और कीटों के आश्रय (Animal Shelters)

​अलग-अलग जानवर अलग-अलग तरह के घरों में रहते हैं। UPTET में यहाँ से मिलान करने वाले प्रश्न (Matching questions) आते हैं:

  • शेर, भालू, लोमड़ी: ये जानवर गुफा या मांद में रहते हैं।
  • कुत्ता: कुत्ताघर में रहता है।
  • घोड़ा और गधा: ये अस्तबल में रहते हैं।
  • गाय, बैल और भैंस: ये सायबान (शेड) में रहते हैं।
  • बंदर और चिंपैंजी: ये पेड़ों की शाखाओं पर रहते हैं।
  • चूहा, सांप, खरगोश और चींटी: ये ज़मीन के अंदर 'बिल' बनाकर रहते हैं।
  • मकड़ी: जाला बनाकर रहती है।
  • मधुमक्खी और ततैया (बर्र): ये छत्ता बनाकर रहते हैं।
  • मुर्गी: दड़बा में रहती है।
  • सुअर: बाड़ा में रहता है।


​🔹 3. पक्षियों के आश्रय / घोंसले (Birds and their Nests) - [UPTET रामबाण]

​पक्षी अपना घोंसला केवल और केवल 'अंडे देने' के लिए बनाते हैं। जब अंडों से बच्चे निकल जाते हैं और उड़ना सीख जाते हैं, तो पक्षी अपना घोंसला छोड़ देते हैं। कुछ पक्षियों के घोंसले बहुत ही विशिष्ट होते हैं:

  1. कौआ (Crow): * यह पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर अपना घोंसला बनाता है।
    • ​इसके घोंसले में लोहे के तार और लकड़ी की शाखाएं होती हैं।
    • UPTET फैक्ट: 'कोयल' अपना घोंसला कभी नहीं बनाती। वह कौए के घोंसले में ही अपने अंडे देती है और कौआ उन्हें अपना समझकर सेता है।
  2. गौरैया और कबूतर:
    • ​ये अक्सर हमारे घरों के आस-पास, अलमारी के ऊपर, आईने के पीछे या रोशनदान में घोंसला बनाते हैं।
  3. दर्जिन चिड़िया (Tailor Bird):
    • ​जैसा कि इसका नाम है (दर्जी), यह अपनी नुकीली चोंच से पत्तों को 'सीलकर' (सिलाई करके) अपना घोंसला बनाती है।
  4. बया या जुलाहा पक्षी (Weaver Bird):
    • ​इसका घोंसला लालटेन की तरह लटका हुआ होता है।
    • रोचक तथ्य: सभी नर (Male) पक्षी घोंसला बनाते हैं, और मादा पक्षी उन सभी घोंसलों को देखकर जो सबसे अच्छा लगता है, उसी में अंडे देती है।
  5. कलचिड़ी (Indian Robin):
    • ​यह पत्थरों के बीच खाली जगह में अपना घोंसला बनाती है। इसका घोंसला घास, ऊन, बाल और रुई से बना बहुत ही मुलायम होता है।
  6. उल्लू (Owl):
    • ​यह पेड़ के खोखले तने (Hollow) में रहता है। यह रात में जागने वाला पक्षी है जो अपनी गर्दन को काफी पीछे तक घुमा सकता है।
  7. कठफोड़वा (Woodpecker):
    • ​यह पेड़ के तने में छेद करके (अपनी चोंच से ठुक-ठुक करके) उसमें छिपे कीड़ों को खाता है और उसी छेद में अपना घोंसला बनाता है।
  8. चील, बाज और गिद्ध:
    • ​चील का घोंसला सबसे बड़ा (लगभग 4 से 5 फीट चौड़ा) होता है। यह इलाके के सबसे ऊँचे पेड़ पर घोंसला बनाती है और साल-दर-साल उसी का प्रयोग करती है।



​🔹 4. मानव आवास: विशिष्ट क्षेत्रों के विशेष घर (Houses in Specific Regions)

​मनुष्य का घर वहाँ की जलवायु (Climate) और वहाँ मिलने वाली निर्माण सामग्री पर निर्भर करता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में मौसम के हिसाब से अलग-अलग घर बनते हैं। (UPTET में यहाँ से 100% प्रश्न छपते हैं):

​🌟 1. असम के घर (भारी बारिश वाले क्षेत्र)

  • ​असम में बहुत अधिक बारिश होती है, इसलिए यहाँ के घर ज़मीन से लगभग 10 से 12 फीट (या 3 से 3.5 मीटर) की ऊँचाई पर बनाए जाते हैं।
  • ​ये घर 'मज़बूत बांस के खंभों' पर टिके होते हैं ताकि बाढ़ का पानी घर के अंदर न आए।
  • ​ये घर अंदर से भी पूरी तरह लकड़ी के बने होते हैं और इनकी छतें ढलवां (Slanting) होती हैं।

​🌟 2. राजस्थान के घर (अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्र)

  • ​राजस्थान में बारिश बहुत कम होती है और गर्मी बहुत भयंकर पड़ती है।
  • ​यहाँ के घर मिट्टी के बने होते हैं। घरों की दीवारें बहुत 'मोटी' बनाई जाती हैं ताकि बाहर की गर्मी अंदर न आ सके।
  • ​दीवारों को सुंदर दिखने और कीड़ों से बचाने के लिए मिट्टी और गाय के गोबर से लीपा जाता है।
  • ​इन घरों की छतें 'कटीली झाड़ियों' (जैसे नीम, कीकर) से बनाई जाती हैं।

​🌟 3. मनाली / हिमाचल प्रदेश के घर (बारिश और बर्फबारी वाले क्षेत्र)

  • ​मनाली एक पहाड़ी इलाका है जहाँ बहुत अधिक बारिश भी होती है और बर्फ भी पड़ती है।
  • ​यहाँ के घर पत्थर और लकड़ी दोनों को मिलाकर बनाए जाते हैं।
  • ​बर्फ और पानी को आसानी से नीचे गिराने के लिए इनकी छतें भी 'ढलवां' (Slanting) बनाई जाती हैं।

​🌟 4. कश्मीर और केरल के घर (हाउस-बोट)

  • ​कश्मीर (डल झील) और केरल में पानी के ऊपर तैरने वाले घर पाए जाते हैं जिन्हें 'हाउस-बोट' कहा जाता है।
  • ​ये हाउस-बोट 80 फीट तक लंबे हो सकते हैं।
  • ​कश्मीर की हाउस-बोटों की लकड़ी की छतों पर बहुत सुंदर नक्काशी (डिजाइन) की जाती है, जिसे 'खत्मबंद' कहा जाता है।
  • डोंगा: कश्मीर में जो स्थानीय लोग नदी में तैरते हुए साधारण घरों में रहते हैं, उन्हें 'डोंगा' कहते हैं (इनमें नक्काशी नहीं होती)।

​🌟 5. लेह-लद्दाख के घर (ठंडे रेगिस्तान)

  • ​यहाँ के घर 'दो मंज़िला' होते हैं और पत्थरों को काटकर एक के ऊपर एक रखकर बनाए जाते हैं।
  • ​दीवारों पर मिट्टी और चूने की पुताई होती है।
  • विशेषता: निचली मंज़िल (Ground floor) पर कोई खिड़की नहीं होती। यहाँ ये लोग अपने जानवरों को रखते हैं और सर्दियों में खुद भी वहीं आ जाते हैं। ऊपरी मंज़िल पर लकड़ी के फर्श होते हैं। छतें समतल (Flat) होती हैं जहाँ लाल मिर्च और फल सुखाए जाते हैं।

​🌟 6. इग्लू (Igloo - बर्फ के घर)

  • ​बहुत अधिक ठंडे बर्फीले इलाकों में 'एस्किमो' जनजाति के लोग बर्फ के टुकड़ों (Blocks) को जोड़कर गुंबद के आकार का घर बनाते हैं, जिसे 'इग्लू' कहते हैं।
  • ​इसका दरवाज़ा बहुत छोटा होता है ताकि बाहर की ठंडी हवा अंदर न जा सके। बर्फ की दीवारें अंदर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देतीं।

​🌟 7. चांगपा जनजाति का टेंट (रेबो)

  • ​लद्दाख के पहाड़ों पर रहने वाली 'चांगपा' जनजाति एक विशेष प्रकार का शंक्वाकार (Cone-shaped) टेंट बनाती है जिसे 'रेबो' कहते हैं।
  • ​यह टेंट 'याक' (पहाड़ी सांड) के बालों से बनी पट्टियों से बुना जाता है, जो बहुत मज़बूत और गर्म होता है।




​🔹 5. निर्माण सामग्री (Materials Used in Houses)

  • कच्चे घर: मिट्टी, पुआल, घास-फूस, बांस, और गोबर से बनते हैं। (मुख्यतः गाँवों में)।
  • पक्के घर: ईंट, सीमेंट, लोहा, कंक्रीट, बालू और कांच से बनते हैं। (मुख्यतः शहरों में)।
  • ​पर्यावरण के अनुकूल घर वे होते हैं जिनमें प्राकृतिक रोशनी और हवा आने की अच्छी व्यवस्था हो।

​🔹 6. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले 10 महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)

​UPTET Paper 1 के लिए SK SACHIN CLASSES के ये 'रामबाण' बिंदु बिल्कुल रट लें:

  1. असम के घर: ज़मीन से 10-12 फीट ऊँचे, बांस के खंभों पर बनते हैं।
  2. कटीली झाड़ियों की छतें: राजस्थान के मिट्टी के घरों में होती हैं।
  3. कोयल का घोंसला: कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती, यह कौए के घोंसले में अंडे देती है।
  4. पत्थरों के बीच घोंसला: कलचिड़ी (Indian Robin) पक्षी बनाती है।
  5. सबसे ऊँची डाल पर घोंसला: कौआ (Crow) बनाता है।
  6. इग्लू (Igloo): एस्किमो जनजाति द्वारा बनाया गया बर्फ का घर।
  7. चांगपा जनजाति का टेंट: इसे 'रेबो' कहा जाता है (याक के बालों से बना)।
  8. हाउस-बोट की नक्काशी: इसे 'खत्मबंद' कहा जाता है (कश्मीर में)।
  9. मनाली के घर: पत्थर और लकड़ी के बने होते हैं, जिनकी छतें ढलवां होती हैं।
  10. दर्जिन चिड़िया: यह पत्तों को अपनी चोंच से सीलकर घोंसला बनाती है।


निष्कर्ष (Conclusion): आश्रय या घर केवल ईंट और पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह वह सुरक्षित स्थान है जो हमें प्रकृति के कठोर मौसम से बचाता है। एक पर्यावरण अध्ययन के शिक्षक के रूप में आपको यह समझना चाहिए कि मनुष्य और जानवरों ने अपनी भौगोलिक परिस्थितियों (ठंड, गर्मी, बारिश) के अनुकूल खुद को ढाल लिया है और उसी के अनुसार अपने घर बनाना सीख लिया है।


👉अध्याय 02 के लिए यहां क्लिक करें 


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UPTET पर्यावरण: आश्रय एवं आवास

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