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UPTET/CTET 2026 बाल विकास Chapter 15: स्मृति और विस्मृति (Memory & Forgetting) | SK SACHIN CLASSES

 

​🌟 UPTET & CTET 2026: बाल विकास (CDP) अध्याय 15 - स्मृति और विस्मृति (विस्तृत नोट्स) 🌟




​दोस्तों, SK SACHIN CLASSES के शिक्षा मंच पर आपका एक बार फिर से स्वागत है!

​बाल विकास (CDP) की हमारी अध्यायवार सीरीज़ में आज हम मनोविज्ञान के एक ऐसे विषय पर चर्चा करेंगे जो हमारे रोज़मर्रा के जीवन से सीधा जुड़ा है— स्मृति (Memory) और विस्मृति (Forgetting)

​हम दिन भर में हज़ारों बातें देखते और सुनते हैं, लेकिन हमें सब कुछ याद नहीं रहता। कुछ बातें हम जीवन भर नहीं भूलते और कुछ हम अगले ही दिन भूल जाते हैं। ऐसा क्यों होता है? एक शिक्षक के रूप में यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बच्चों की 'याददाश्त' कैसे काम करती है और वे पढ़ाई गई बातों को क्यों भूल जाते हैं। आइए, इसे बहुत ही गहराई से समझते हैं।





​🔹 1. स्मृति का अर्थ और परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Memory)

​सामान्य भाषा में किसी पुरानी बात को 'याद रखना' ही स्मृति है। मनोविज्ञान के अनुसार, "हमारे पूर्व अनुभवों (Past experiences) को अचेतन मन से निकालकर चेतन मन (Conscious mind) में लाने की प्रक्रिया ही स्मृति कहलाती है।"

UPTET के लिए महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (इन्हें रट लें):

1. आर. एस. वुडवर्थ (R.S. Woodworth) के अनुसार:

​"सीखी हुई बात को स्मरण (याद) रखना ही स्मृति है।" (UPTET में सबसे ज्यादा पूछी जाने वाली परिभाषा)


2. मैकडूगल (McDougall) के अनुसार:

​"अतीत (Past) की घटनाओं की कल्पना करना और इस तथ्य को पहचान लेना कि ये अतीत के अनुभव हैं, ही स्मृति है।"


3. स्टाउट (Stout) के अनुसार:

​"स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति (Ideal revival) है।"






​🔹 2. स्मृति के अंग या चरण (Elements / Stages of Memory)

​स्मृति कोई एक झटके में होने वाला काम नहीं है, बल्कि यह एक क्रमिक प्रक्रिया (Sequential process) है। वुडवर्थ ने स्मृति के 4 मुख्य अंग (चरण) बताए हैं। परीक्षा में इनका सही क्रम (Sequence) पूछा जाता है:

1. सीखना या अधिगम (Learning):

स्मृति का सबसे पहला चरण है किसी भी नई बात को सीखना। यदि आप कोई चीज़ सीखेंगे ही नहीं, तो उसे याद कैसे रखेंगे?

2. धारण करना (Retention):

सीखी गई बात को अपने मस्तिष्क (Brain) में लंबे समय तक सुरक्षित (Store) रखना 'धारण' कहलाता है। जिसकी धारण शक्ति जितनी अच्छी होती है, उसकी स्मृति उतनी ही तेज़ मानी जाती है।

3. प्रत्याह्वान या पुनः स्मरण (Recall):

जब भी ज़रूरत पड़े, तो धारण की गई बात को अपने दिमाग से बाहर (चेतन मन में) वापस लाना। (जैसे- परीक्षा हॉल में बैठे-बैठे उत्तर को याद करने की कोशिश करना)।

4. पहचान (Recognition):

किसी देखी हुई या सीखी हुई चीज़ को दोबारा देखकर तुरंत पहचान लेना कि "हाँ, इसे मैंने पहले देखा है।" (जैसे- बहुविकल्पीय प्रश्नों / MCQs में सही उत्तर को पहचानना)।

  • नोट: UPTET फैक्ट: प्रत्याह्वान (Recall) की तुलना में पहचानना (Recognition) हमेशा अधिक आसान होता है। (इसीलिए बच्चों को निबंधात्मक प्रश्नों की तुलना में बहुविकल्पीय प्रश्न आसान लगते हैं)।




​🔹 3. स्मृति के प्रकार (Types of Memory)

​मनोवैज्ञानिक रिचर्ड एटकिंसन और रिचर्ड शिफरिन (Atkinson & Shiffrin) ने स्मृति को समय (Time) के आधार पर 3 मुख्य भागों में बांटा है:

A. संवेदी स्मृति (Sensory Memory):

  • ​यह हमारी पाँचों इंद्रियों (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) से जुड़ी होती है।
  • ​इसकी अवधि सबसे कम (केवल 1 से 3 सेकंड) होती है।
  • ​जैसे- रास्ते में चलते हुए किसी अनजान व्यक्ति का चेहरा देखना, जो एक सेकंड में भूल जाता है।

B. अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory - STM):

  • ​इसे 'कार्यकारी स्मृति' (Working Memory) भी कहते हैं।
  • ​इसकी अवधि 20 से 30 सेकंड तक होती है।
  • मिलर का जादुई अंक (Miller's Magic Number): जॉर्ज मिलर के अनुसार एक इंसान अपनी अल्पकालिक स्मृति में एक साथ केवल 7 ± 2 (यानी 5 से 9) चीज़ें ही याद रख सकता है। (जैसे- किसी का मोबाइल नंबर डायल करते समय याद रखना)।

C. दीर्घकालिक स्मृति (Long-Term Memory - LTM):

  • ​जब हम किसी जानकारी का बार-बार अभ्यास (Rehearsal) करते हैं, तो वह अल्पकालिक स्मृति से निकलकर दीर्घकालिक स्मृति में चली जाती है।
  • ​इसकी अवधि 'आजीवन' (Life-time) हो सकती है और इसकी क्षमता असीमित (Unlimited) होती है। (जैसे- अपना नाम, माता-पिता का नाम, बचपन की कोई खास घटना)।

अन्य व्यावहारिक प्रकार:

  • रटंत स्मृति (Rote Memory): बिना समझे तोते की तरह रट लेना। (यह सबसे निम्न स्तर की स्मृति है)।
  • तार्किक स्मृति (Logical Memory): किसी बात को नियम और तर्क के साथ समझकर याद रखना। (यह सबसे उत्तम है)।



​🔹 4. विस्मृति का अर्थ (Meaning of Forgetting)

​मनोविज्ञान में विस्मृति (भूलना) कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमाग को सुरक्षित रखने का एक प्राकृतिक और ज़रूरी तरीका है। अगर हम जीवन की सारी दुखद और फालतू बातें याद रखें, तो हम पागल हो जाएंगे।

परिभाषा (मन के अनुसार):

​"ग्रहण किए गए तथ्यों को धारण करने या उनका पुनः स्मरण करने में असफल होना ही विस्मृति (भूलना) है।"


हरमन एबिंगहास (Hermann Ebbinghaus) - स्मृति के जनक:

  • ​UPTET का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य: स्मृति और विस्मृति पर दुनिया में सबसे पहला वैज्ञानिक और प्रायोगिक अध्ययन जर्मनी के मनोवैज्ञानिक हरमन एबिंगहास ने 1885 में किया था।
  • ​इन्होंने 'निरर्थक पदों' (Nonsense Syllables) का प्रयोग किया था। (ऐसे शब्द जिनका कोई अर्थ नहीं होता, जैसे- ZEQ, XAC)।
  • ​इन्होंने 'विस्मृति वक्र' (Forgetting Curve) दिया, जो बताता है कि इंसान सीखने के 20 मिनट बाद ही लगभग 42% हिस्सा भूल जाता है, और 31 दिन बाद केवल 21% हिस्सा ही याद रहता है।

​🔹 5. विस्मृति (भूलने) के मुख्य कारण (Causes of Forgetting)

​हम सीखी हुई बातों को क्यों भूल जाते हैं? इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण काम करते हैं:

1. अनाभ्यास का सिद्धांत (Trace Decay Theory):

यदि हम सीखी हुई बात का लंबे समय तक 'अभ्यास' (Practice) नहीं करते, तो हमारे दिमाग में बने उसके स्मृति-चिह्न (Memory traces) धीरे-धीरे मिटने (Decay) लगते हैं और हम भूल जाते हैं। (जैसे- यदि आप गणित के फॉर्मूले कई महीनों तक न पढ़ें, तो भूल जाएंगे)।

2. हस्तक्षेप का सिद्धांत (Interference Theory):

जब कोई नई सीखी गई बात या पुरानी सीखी गई बात आपस में टकराती हैं, तो उसे हस्तक्षेप कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है:

  • अग्रलक्षी हस्तक्षेप (Proactive Interference): जब 'पुराना' ज्ञान, नया ज्ञान याद करने में बाधा डाले। (जैसे- पुरानी याद की गई कविता के कारण नई कविता याद न होना)।
  • पश्चलक्षी हस्तक्षेप (Retroactive Interference): जब 'नया' ज्ञान, पुराने ज्ञान को भुला दे। (जैसे- नया मोबाइल नंबर याद हो जाने पर पुराना नंबर पूरी तरह भूल जाना)।

3. दमन का सिद्धांत (Theory of Repression) - सिगमंड फ्रायड:

सिगमंड फ्रायड के अनुसार हम जीवन की कुछ बहुत ही 'दुखद', 'अपमानजनक' और 'शर्मनाक' बातों को जानबूझकर अपने 'अचेतन मन' (Unconscious mind) में दबा (दमन कर) देते हैं। फ्रायड के अनुसार भूलना एक 'सक्रिय और ऐच्छिक' प्रक्रिया है।

4. संवेगात्मक बाधा (Emotional Block):

यदि परीक्षा के समय बच्चा बहुत ज़्यादा डर जाए (भय) या घबरा जाए (क्रोध/चिंता), तो वह याद की हुई चीज़ें भी भूल जाता है। संवेग (Emotions) स्मृति को ब्लॉक कर देते हैं।





​🔹 6. स्मृति को बेहतर बनाने के उपाय (Ways to Improve Memory)

​एक शिक्षक के रूप में आप बच्चों की याददाश्त कैसे बढ़ा सकते हैं?

  • खंड विधि (Chunking): बड़ी जानकारी को छोटे-छोटे टुकड़ों (Chunks) में बांटकर याद कराना। (जैसे 10 अंकों का मोबाइल नंबर 3-3-4 के टुकड़ों में याद करना)।
  • सस्वर पाठ (Recitation): बोल-बोल कर पढ़ना।
  • निमोनिक्स (Mnemonics): याद करने के लिए ट्रिक्स या शॉर्टकट बनाना। (जैसे- इंद्रधनुष के रंगों को VIBGYOR या बैनीआहपीनाला से याद रखना)।
  • विराम विधि (Spaced Learning): लगातार कई घंटों तक पढ़ने की बजाय, बीच-बीच में आराम (Break) लेकर पढ़ना।

​🔹 7. UPTET विशेष: परीक्षा में छपने वाले महत्वपूर्ण तथ्य (Most Important Facts)

​UPTET परीक्षा के लिए SK SACHIN CLASSES के कुछ सीधे और सटीक बिंदु जिन्हें आपको बिल्कुल कंठस्थ कर लेना है:

  • ज़ीगार्निक प्रभाव (Zeigarnik Effect): रूसी मनोवैज्ञानिक 'ब्लूमा ज़ीगार्निक' ने सिद्ध किया था कि "इंसान को पूरे हो चुके कामों की तुलना में, 'अधूरे छोड़े गए काम' ज़्यादा अच्छी तरह याद रहते हैं।"
  • ​स्मृति पर सबसे पहला अध्ययन किसने किया? हरमन एबिंगहास ने।
  • ​निरर्थक पदों (Nonsense Syllables) का प्रयोग किसने किया? हरमन एबिंगहास ने।
  • मिलर का जादुई अंक (Magic Number): 7 ± 2 (अर्थात 5 से 9)। यह अल्पकालिक स्मृति (STM) की क्षमता को बताता है।
  • ​"सीखी हुई बात को याद रखना ही स्मृति है" - यह परिभाषा वुडवर्थ की है।
  • ​फ्रायड के अनुसार दुःखद बातों को भूलना एक प्रयासपूर्ण (Intentional) कार्य है, जिसे 'दमन' (Repression) कहते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion): स्मृति और विस्मृति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जहाँ एक ओर अच्छी स्मृति जीवन में सफलता की सीढ़ी है, वहीं दूसरी ओर 'विस्मृति' भी ईश्वर का दिया एक वरदान है जो हमें पुराने दुखों और कड़वे अनुभवों से बाहर निकालकर एक नई शुरुआत करने का मौका देती है। एक शिक्षक को रटंत स्मृति की बजाय बच्चों में तार्किक और समझ आधारित स्मृति का विकास करना चाहिए।

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