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⭐ UPTET संस्कृत अध्याय 8: सम्पूर्ण सन्धि एवं समास (रामबाण नोट्स और ट्रिक्स) ⭐

 

​⭐ UPTET संस्कृत सम्पूर्ण रामबाण नोट्स: अध्याय 8 ⭐

​विषय: स्वर, व्यंजन एवं विसर्ग सन्धियाँ तथा समास प्रकरण




​प्रिय भावी शिक्षकों, SK SACHIN CLASSES के इस सबसे महत्वपूर्ण अध्याय में आपका स्वागत है। संस्कृत व्याकरण में सन्धि (दो वर्णों का मेल) और समास (दो शब्दों का मेल) ऐसे विषय हैं, जो छात्रों को अक्सर कठिन लगते हैं।

​किन्तु आज हम सूत्रों को रटने के बजाय, 'शब्द को देखकर सन्धि और समास पहचानने की रामबाण ट्रिक्स' सीखेंगे। पिछले अध्याय में हमने 'दीर्घ सन्धि' (अकः सवर्णे दीर्घः) को समझा था, आज हम आगे की सन्धियों और समास का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

​⭐ भाग 1: स्वर सन्धि (Vowel Sandhi) - महत्वपूर्ण भेद एवं ट्रिक्स

​जब दो स्वरों के मिलने से परिवर्तन होता है, तो उसे स्वर (अच्) सन्धि कहते हैं। दीर्घ सन्धि के बाद इसके 4 सबसे महत्वपूर्ण भेद इस प्रकार हैं:

​1. गुण सन्धि (Gun Sandhi)

  • सूत्र: आद् गुणः (UPTET में सीधा पूछा जाता है)।
  • नियम: यदि अ/आ के बाद इ/ई आए तो 'ए', उ/ऊ आए तो 'ओ', और ऋ आए तो 'अर्' हो जाता है।
  • SK SACHIN CLASSES रामबाण ट्रिक: जिस शब्द के बीच में एक मात्रा (े या ो) दिखाई दे या ऊपर 'रेफ' (र्) लगा हो, वह 99% गुण सन्धि होगा।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण:
    • ​नर + इन्द्रः = नरेन्द्रः (अ + इ = ए)
    • ​महा + ईशः = महेशः
    • ​सूर्य + उदयः = सूर्योदयः (अ + उ = ओ)
    • ​महा + उत्सवः = महोत्सवः
    • ​महा + ऋषिः = महर्षिः (आ + ऋ = अर्)
    • ​वसन्त + ऋतुः = वसन्तर्तुः

​2. वृद्धि सन्धि (Vriddhi Sandhi)

  • सूत्र: वृद्धिरेचि
  • नियम: यदि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो 'ऐ', और ओ/औ आए तो 'औ' हो जाता है।
  • रामबाण ट्रिक: जिस शब्द के बीच में दो मात्राएँ (ै या ौ) दिखाई दें, वह वृद्धि सन्धि होगा। (गुण में एक मात्रा, वृद्धि में दो मात्रा)।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण:
    • ​एक + एकम् = एकैकम् (अ + ए = ऐ)
    • ​सदा + एव = सदैव
    • ​महा + औषधिः = महौषधिः (आ + औ = औ)
    • ​वन + ओकः = वनौकः

​3. यण् सन्धि (Yan Sandhi)

  • सूत्र: इको यणचि
  • नियम: यदि इ/ई, उ/ऊ, ऋ, ऌ के बाद कोई 'असमान स्वर' आए, तो इ का 'य्', उ का 'व्', ऋ का 'र्' और ऌ का 'ल्' हो जाता है।
  • रामबाण ट्रिक: यदि य्, व्, र्, ल् से ठीक पहले कोई आधा अक्षर (Half letter) हो, तो वहाँ यण् सन्धि होती है।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण:
    • ​इति + आदि = इत्यादि (यहाँ 'य' से पहले आधा 'त' है)।
    • ​सु + आगतम् = स्वागतम् ('व' से पहले आधा 'स' है)।
    • ​मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा (त्र = त् + र)।
    • ​ऌ + आकृतिः = लाकृतिः (अति महत्वपूर्ण अपवाद)।

​4. अयादि सन्धि (Ayadi Sandhi)

  • सूत्र: एचोऽयवायावः
  • नियम: यदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आए, तो 'ए' का 'अय्', 'ऐ' का 'आय्', 'ओ' का 'अव्', और 'औ' का 'आव्' हो जाता है।
  • रामबाण ट्रिक: जिन शब्दों के बीच में अय, आय, अव, आव की ध्वनि आए और शब्द में प्रायः 3 अक्षर हों।
  • महत्वपूर्ण उदाहरण:
    • ​ने + अनम् = नयनम् (अय् की ध्वनि)
    • ​गै + अकः = गायकः (आय् की ध्वनि)
    • ​पो + अनः = पवनः (अव् की ध्वनि)
    • ​पौ + अकः = पावकः (आव् की ध्वनि)

​⭐ भाग 2: व्यंजन सन्धि (Consonant Sandhi / हल् सन्धि)

​व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन आने पर जो परिवर्तन होता है। UPTET में इसके 3 भेद सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं:

​1. श्चुत्व सन्धि (Schutva Sandhi)

  • सूत्र: स्तोः श्चुना श्चुः
  • नियम: यदि त-वर्ग (त, थ, द, ध, न) या 'स्' के साथ च-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ) या 'श्' का मेल हो, तो त-वर्ग च-वर्ग में बदल जाता है।
  • उदाहरण:
    • ​सत् + चित् = सच्चित् (त् का च् हो गया)
    • ​रामस् + शेते = रामश्शेते
    • ​उद् + ज्वलः = उज्ज्वलः

​2. जशत्व सन्धि (Jashatva Sandhi)

  • सूत्र: झलां जशोऽन्ते
  • नियम: यदि किसी वर्ग के पहले अक्षर (क, च, ट, त, प) के बाद कोई स्वर या वर्ग का तीसरा/चौथा अक्षर आए, तो पहला अक्षर अपने ही वर्ग के तीसरे अक्षर (ग, ज, ड, द, ब) में बदल जाता है।
  • उदाहरण:
    • ​वाक् + ईशः = वागीशः (क् का ग् हो गया)
    • ​अच् + अन्तः = अजन्तः (च् का ज् हो गया)
    • ​जगत् + ईशः = जगदीशः (त् का द् हो गया)
    • ​सुप् + अन्तः = सुबन्तः (प् का ब् हो गया)

​3. तोर्लि सन्धि (Torli Sandhi)

  • सूत्र: तोर्लि
  • नियम: यदि त-वर्ग (त,थ,द,ध,न) के बाद 'ल्' आए, तो त-वर्ग भी 'ल्' में बदल जाता है।
  • उदाहरण:
    • ​तत् + लीनः = तल्लीनः (त् का ल्)
    • ​उत् + लासः = उल्लासः
    • ​विद्वान् + लिखति = विद्वाँल्लिखति

​⭐ भाग 3: विसर्ग सन्धि (Visarga Sandhi)

​विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है।

1. सत्व सन्धि: यदि विसर्ग के बाद च/छ आए तो 'श्', ट/ठ आए तो 'ष्', और त/थ आए तो 'स्' हो जाता है।

  • ​नमः + ते = नमस्ते (: का स् हो गया)।
  • ​रामः + च = रामश्च (: का श् हो गया)।

2. उत्व सन्धि: विसर्ग का 'ओ' हो जाना।

  • ​मनः + रथः = मनोरथः
  • ​यशः + दा = यशोदा
  • ​बालः + अयम् = बालोऽयम् (यहाँ पूर्वरूप भी हुआ है)।

3. रुत्व/लोप सन्धि: * निः + रोगः = नीरोगः (UPTET का फेवरेट! विसर्ग का लोप होकर छोटी 'नि' बड़ी 'नी' में बदल जाती है)।

  • ​निः + रसः = नीरसः

​⭐ भाग 4: समास प्रकरण (Compound Words)

​सन्धि वर्णों का मेल है, जबकि समास दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) का मेल है। "समसनं समासः" (संक्षेप करना ही समास है)। समास के मुख्य 6 भेद होते हैं:

​1. अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)

  • पहचान: पहला पद अव्यय (उपसर्ग) होता है और वही प्रधान होता है।
  • ट्रिक: शब्द की शुरुआत में उप, अनु, प्रति, यथा, आ, निर्, स लगा हो।
  • उदाहरण:
    • प्रतिदिनम्: दिनं दिनं प्रति
    • यथाशक्ति: शक्तिम् अनतिक्रम्य
    • उपकृष्णम्: कृष्णस्य समीपम् (UPTET में बहुत आता है)।
    • निर्मक्षिकम्: मक्षिकाणाम् अभावः

​2. तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)

  • पहचान: उत्तर पद (बाद वाला शब्द) प्रधान होता है। कारक चिह्नों (को, से, के लिए, का, की) का लोप होता है।
  • उदाहरण:
    • राजपुत्रः: राज्ञः पुत्रः (राजा का पुत्र - षष्ठी तत्पुरुष)।
    • ग्रामगतः: ग्रामं गतः (गाँव को गया हुआ - द्वितीया)।
    • चोरभयम्: चोरात् भयम् (चोर से डर - पञ्चमी तत्पुरुष)। (नोट: 'भय' के साथ हमेशा पञ्चमी तत्पुरुष होता है)।

​3. कर्मधारय समास (Karmadharay Samas)

  • पहचान: एक पद विशेषण (adjective) और दूसरा विशेष्य (noun) होता है। (कैसा है का उत्तर मिलता है)।
  • उदाहरण:
    • नीलकमलम्: नीलम् च तत् कमलम् (नीला है जो कमल)।
    • महापुरुषः: महान् चासौ पुरुषः (महान है जो पुरुष)।
    • घनश्यामः: घन इव श्यामः (बादल के समान काले)।

​4. द्विगु समास (Dvigu Samas)

  • पहचान: पहला पद संख्यावाचक (Number) होता है। "संख्यापूर्वो द्विगुः"।
  • उदाहरण:
    • पञ्चवटी: पञ्चानां वटानां समाहारः (5 वट वृक्षों का समूह)।
    • त्रिभुवनम्: त्रयाणां भुवनानां समाहारः।
    • चौराहा: चतुर्णां पथानां समाहारः।

​5. द्वन्द्व समास (Dvandva Samas)

  • पहचान: दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह करने पर बीच में 'च' (और) आता है।
  • उदाहरण:
    • रामलक्ष्मणौ: रामः च लक्ष्मणः च।
    • पितरौ: माता च पिता च (इसे एकशेष द्वन्द्व कहते हैं, यह UPTET में बहुत पूछा जाता है)।
    • हरिहरौ: हरिः च हरः च।

​6. बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)

  • पहचान: कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति (प्रायः भगवान) की ओर इशारा करते हैं। "अन्यपदार्थप्रधानो बहुव्रीहिः"।
  • उदाहरण:
    • दशाननः: दश आननानि यस्य सः (दस सिर हैं जिसके - अर्थात् रावण)।
    • पीताम्बरः: पीतम् अम्बरम् यस्य सः (पीले वस्त्र हैं जिसके - अर्थात् विष्णु/कृष्ण)।
    • लम्बोदरः: लम्बम् उदरम् यस्य सः (गणेश)।
    • चन्द्रशेखरः: जिसके सिर पर चन्द्र हो (शिव)।

​⭐ भाग 5: विगत वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण (UPTET PYQ Analysis)

  • प्रश्न 1: 'पितरौ' शब्द में कौन सा समास है? (UPTET 2017)
    • विश्लेषण: सही उत्तर द्वन्द्व समास है। इसे 'एकशेष द्वन्द्व' कहते हैं क्योंकि माता च पिता च मिलकर केवल 'पितरौ' रह जाता है।
  • प्रश्न 2: 'महोत्सवः' में कौन सी सन्धि है? (UPTET 2016)
    • विश्लेषण: सही उत्तर गुण सन्धि (महा + उत्सवः) है। ऊपर एक मात्रा (ो) है, जो गुण सन्धि की पहचान है।
  • प्रश्न 3: 'अव्ययीभाव' समास का उदाहरण है? (UPTET 2018)
    • विश्लेषण: 'यथाशक्ति', 'प्रतिदिनम्', 'उपकृष्णम्' आदि। जहाँ पहला पद उपसर्ग/अव्यय हो।
  • प्रश्न 4: 'नयनम्' में कौन सी सन्धि है? (UPTET 2014)
    • विश्लेषण: सही उत्तर अयादि सन्धि (ने + अनम्) है। यहाँ 'अय्' की ध्वनि आ रही है।
  • प्रश्न 5: 'चोरभयम्' में कौन सा तत्पुरुष है? (UPTET 2019)
    • विश्लेषण: सही उत्तर पञ्चमी तत्पुरुष (चोरात् भयम्) है। संस्कृत में 'भी' (डरना) धातु के योग में हमेशा पञ्चमी विभक्ति लगती है।

SK SACHIN CLASSES का निष्कर्ष: यदि आप इस लेख को ध्यान से पढ़ लेते हैं, तो सन्धि और समास का कोई भी प्रश्न आपसे अछूता नहीं रहेगा।

​अब समय है अपनी तैयारी को परखने का! नीचे दिए गए 50 प्रश्नों के एंटी-तुक्का मॉक टेस्ट को हल करें।

UPTET Sanskrit Sandhi & Samas Quiz

सन्धि एवं समास प्रकरण (अध्याय 8)

SK SACHIN CLASSES | UPTET संस्कृत मॉक टेस्ट
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