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UPTET EVS Top 100 Questions 2026 | पर्यावरण अध्ययन के रामबाण PYQ - SK SACHIN CLASSES

नमस्कार दोस्तों! SK SACHIN CLASSES में आपका स्वागत है। शिक्षक भर्ती (UPTET 2026 और Super TET) में पर्यावरण अध्ययन (EVS) एक ऐसा विषय है जिसमें भूगोल, विज्ञान, संविधान और यूपी स्पेशल सब कुछ शामिल होता है। अगर आप इसमें 30/30 का स्कोर करना चाहते हैं, तो पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और संभावित प्रश्नों का अभ्यास बहुत जरूरी है। आज हम आपके लिए UPTET EVS के टॉप 100 रामबाण प्रश्न लेकर आए हैं। हर प्रश्न के नीचे दी गई 'व्याख्या' और 'जादुई ट्रिक्स' को जरूर नोट करें, क्योंकि असली सवाल वहीं से बनते हैं। चलिए शुरू करते हैं! 👇

UPTET Hindi Chapter 10: वाच्य, समास एवं अलंकार की जादुई ट्रिक्स | 2000+ Words रामबाण नोट्स & 50 PYQ Mock Test (SK SACHIN CLASSES)

 

​⭐ अध्याय 10 : वाच्य, समास एवं अलंकार का महा-विश्लेषण (UPTET रामबाण महा-एपिसोड)





SK SACHIN CLASSES स्पेशल: भावी शिक्षकों! हिंदी व्याकरण के इस दसवें अध्याय में आपका स्वागत है। UPTET और CTET परीक्षाओं में 'वाच्य', 'समास', और 'अलंकार' से सबसे अधिक व्यावहारिक प्रश्न (Application-based questions) पूछे जाते हैं।

​परीक्षा में अक्सर छात्र कर्मवाच्य और भाववाच्य में भ्रमित हो जाते हैं, या कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर नहीं कर पाते। आज के इस 2000+ शब्दों के 'रामबाण' लेख में हम इन तीनों टॉपिक का ऐसा सूक्ष्म 'पोस्टमार्टम' करेंगे और ऐसी जादुई ट्रिक्स सीखेंगे कि प्रश्न देखते ही आप मात्र 2 सेकंड में सही उत्तर पहचान लेंगे।



​⭐ भाग 1: वाच्य (Voice) का विस्तृत अध्ययन एवं ट्रिक्स

​क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है, उसे 'वाच्य' कहते हैं।

  • ​सरल शब्दों में: वाक्य का 'बॉस' (प्रधान) कौन है, यही वाच्य तय करता है।
  • हिंदी में वाच्य के 3 भेद होते हैं:

​⭐ 1. कर्तृवाच्य (Active Voice):

  • नियम: जब वाक्य में कर्ता (Subject) की प्रधानता हो और क्रिया का लिंग/वचन कर्ता के अनुसार बदले।
  • सकर्मक और अकर्मक: कर्तृवाच्य में सकर्मक और अकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग हो सकता है।
  • UPTET जादुई ट्रिक: कर्ता के साथ या तो 'ने' लगा होगा, या कर्ता के साथ कोई भी कारक चिह्न (विभक्ति) नहीं होगा (शून्य विभक्ति)।
  • उदाहरण:
    • ​राम ने पुस्तक पढ़ी। (कर्ता के साथ 'ने' है)।
    • ​मोहन स्कूल जाता है। (मोहन के साथ कोई चिह्न नहीं है)।
    • ​सीता गाती है।

​⭐ 2. कर्मवाच्य (Passive Voice):

  • नियम: जब वाक्य में कर्म (Object) की प्रधानता हो और क्रिया कर्म के अनुसार बदले।
  • सकर्मक: इसमें केवल सकर्मक क्रिया का ही प्रयोग होता है (क्योंकि कर्म का होना अनिवार्य है)।
  • UPTET जादुई ट्रिक: कर्ता के साथ 'के द्वारा' या 'से' लगा होता है और वाक्य सकारात्मक (Positive) काम के पूरे होने का भाव देता है।
  • उदाहरण:
    • ​राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी गई।
    • ​किसानों द्वारा खेत जोता गया।
    • ​पत्र लिखा गया। (यहाँ कर्ता छिपा हुआ है, लेकिन काम किसी के द्वारा किया गया है)।

​⭐ 3. भाववाच्य (Impersonal Voice):

  • नियम: जब वाक्य में न कर्ता प्रधान हो न कर्म, बल्कि भाव (क्रिया का अर्थ) प्रधान हो।
  • अकर्मक: इसमें हमेशा अकर्मक क्रिया का ही प्रयोग होता है (कर्म नहीं होता)।
  • UPTET जादुई ट्रिक: कर्ता के साथ 'से' लगा होता है और वाक्य प्रायः नकारात्मक (Negative - असमर्थता/मजबूरी) दर्शाता है।
  • उदाहरण:
    • ​मुझसे चला नहीं जाता
    • ​राम से उठा नहीं जाता
    • ​अब सोया जाए! (यहाँ अनुमति या भाव की प्रधानता है)।





​⭐ भाग 2: समास (Compound) का विस्तृत अध्ययन एवं ट्रिक्स

​'समास' का शाब्दिक अर्थ होता है— 'संक्षेप' (छोटा करना / Shortening)

  • ​दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के मेल से नए सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। (जैसे: राजा का पुत्र = राजपुत्र)।
  • संधि और समास में अंतर: संधि में 'वर्णों' का मेल होता है, जबकि समास में 'शब्दों' (पदों) का मेल होता है।
  • पदों की प्रधानता: समास में दो पद होते हैं— पूर्वपद (पहला शब्द) और उत्तरपद (दूसरा शब्द)।

​⭐ समास के मुख्य 6 भेद होते हैं:

1. अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas):

  • नियम: इसमें पूर्वपद (पहला पद) प्रधान होता है और पहला पद कोई अव्यय (Prefix) होता है।
  • जादुई ट्रिक: शब्द की शुरुआत में अनु, आ, प्रति, यथा, भर, हर, बे, नि आदि उपसर्ग लगे होते हैं। या एक ही शब्द दो बार रिपीट हो (रातों-रात, दिनों-दिन)।
  • उदाहरण (PYQ):
    • यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार)
    • जन्म (जन्म से लेकर)
    • प्रतिदिन (प्रत्येक दिन)
    • ​रातों-रात (रात ही रात में - शब्द की पुनरावृत्ति)

2. तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas):

  • नियम: इसमें उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है। समास विग्रह करने पर बीच में कारक चिह्न (का, की, के, को, से, के लिए, में, पर) निकलते हैं।
  • उदाहरण (PYQ):
    • ​गगनचुंबी (गगन को चूमने वाला - कर्म तत्पुरुष)
    • ​रोगमुक्त (रोग से मुक्त - अपादान तत्पुरुष)
    • ​देशभक्ति (देश के लिए भक्ति - संप्रदान तत्पुरुष)
    • ​राजपुत्र (राजा का पुत्र - संबंध तत्पुरुष)

3. कर्मधारय समास (Karmadharay Samas):

  • नियम: इसमें भी उत्तरपद प्रधान होता है, लेकिन दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य (Adjective-Noun) या उपमेय-उपमान का संबंध होता है।
  • जादुई ट्रिक: विग्रह करने पर बीच में 'है जो' या 'के समान' शब्द आता है।
  • उदाहरण (PYQ):
    • ​नीलकंठ (नीला है जो कंठ - कंठ की विशेषता नीला है)
    • ​महापुरुष (महान है जो पुरुष)
    • ​चंद्रमुख (चंद्रमा के समान मुख)

4. द्विगु समास (Dvigu Samas):

  • नियम: इसमें पूर्वपद (पहला पद) संख्यावाचक (Number) होता है और समूह (Group) का बोध कराता है।
  • जादुई ट्रिक: शब्द की शुरुआत में 1 से 10 तक या कोई भी गिनती छिपी होती है।
  • उदाहरण (PYQ):
    • चौराहा (चार राहों का समूह)
    • नवरात्र (नौ रातों का समूह)
    • त्रिभुज (तीन भुजाओं का समूह)
    • शताब्दी (सौ अब्दों/वर्षों का समूह)

5. द्वन्द्व समास (Dwandwa Samas):

  • नियम: इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत या पूरक होते हैं।
  • जादुई ट्रिक: दोनों शब्दों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) लगा होता है और विग्रह करने पर 'और', 'या', 'अथवा' आता है।
  • उदाहरण (PYQ):
    • ​रात-दिन (रात और दिन)
    • ​माता-पिता (माता और पिता)
    • ​पाप-पुण्य (पाप या पुण्य)

6. बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas):

  • नियम: इसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (Third) विशेष अर्थ की ओर संकेत करते हैं।
  • जादुई ट्रिक: इसके अधिकांश उदाहरण देवताओं के नाम या राक्षसों के नाम होते हैं।
  • उदाहरण (PYQ):
    • ​लंबोदर (लंबा है उदर जिसका = अर्थात् गणेश जी)
    • ​दशानन (दस हैं आनन जिसके = अर्थात् रावण)
    • ​चक्रपाणि (चक्र है पाणि/हाथ में जिसके = अर्थात् विष्णु जी)
  • (कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर: 'नीलकंठ' अगर केवल नीले गले की बात हो तो कर्मधारय, लेकिन अगर विकल्प में 'शिव जी' का संदर्भ हो तो बहुव्रीहि ही सही होगा। UPTET में हमेशा बहुव्रीहि को पहली प्राथमिकता दें)।





​⭐ भाग 3: अलंकार (Figures of Speech) का विस्तृत अध्ययन एवं ट्रिक्स

​'अलंकार' का शाब्दिक अर्थ होता है— 'आभूषण' या 'गहना' (Ornament)

  • ​जिस प्रकार आभूषण पहनने से शरीर की सुंदरता बढ़ती है, उसी प्रकार काव्य (कविता) की सुंदरता बढ़ाने वाले तत्वों को 'अलंकार' कहते हैं। (अलंकरोति इति अलंकारः)।
  • अलंकार के 2 मुख्य भेद होते हैं: 1. शब्दालंकार (शब्दों से चमत्कार) 2. अर्थालंकार (अर्थ से चमत्कार)।

​⭐ 1. शब्दालंकार (Shabdalankar) के 3 प्रमुख भेद:

A. अनुप्रास अलंकार (Anupras):

  • नियम: जहाँ एक ही वर्ण (अक्षर/Letter) की बार-बार आवृत्ति (Repeat) हो।
  • उदाहरण:
    • रनि नूजा माल रुवर बहु छाये। (यहाँ 'त' वर्ण बार-बार आया है)।
    • चारु चंद्र की चंचल किरणें। ('च' वर्ण की आवृत्ति)।

B. यमक अलंकार (Yamak):

  • नियम: जहाँ एक ही शब्द (Word) दो या दो से अधिक बार आए, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग-अलग हो।
  • उदाहरण:
    • कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय। (पहला कनक = सोना, दूसरा कनक = धतूरा)।
    • काली घटा का घमंड घटा। (पहली घटा = बादल, दूसरी घटा = कम होना)।

C. श्लेष अलंकार (Shlesha):

  • नियम: 'श्लेष' का अर्थ होता है- 'चिपकना'। जहाँ एक शब्द केवल एक बार आए, लेकिन उसके अर्थ कई सारे (चिपके हुए) हों।
  • उदाहरण:
    • रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। (यहाँ 'पानी' के तीन अर्थ हैं: मनुष्य के लिए- इज़्ज़त, मोती के लिए- चमक, और चूने के लिए- जल)।
    • ​सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर। (सुबरन के 3 अर्थ: अच्छे शब्द, सुंदर रूप, और सोना)।

​⭐ 2. अर्थालंकार (Arthalankar) के 4 प्रमुख भेद (UPTET V.Imp):

A. उपमा अलंकार (Upama):

  • नियम: जहाँ एक व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे प्रसिद्ध व्यक्ति या वस्तु से की जाए।
  • UPTET जादुई ट्रिक: कविता की पंक्ति में सा, सी, से, सम, समान, सदृश, सरिस शब्द ज़रूर आते हैं।
  • उदाहरण:
    • ​पीपर पात सरिस मन डोला। (मन पीपल के पत्ते के समान डोलने लगा)।
    • ​हरि पद कोमल कमल से

B. रूपक अलंकार (Rupak):

  • नियम: जहाँ उपमेय और उपमान में कोई अंतर न रखा जाए (दोनों को एक मान लिया जाए)। इसमें 'सा/सी/से' का प्रयोग नहीं होता।
  • जादुई ट्रिक: दो शब्दों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) होता है, और तुलना वाले शब्द (सा, सी) गायब होते हैं।
  • उदाहरण:
    • ​मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों। (चाँद को ही खिलौना मान लिया गया है, चाँद सा खिलौना नहीं)।
    • चरन-कमल बंदौ हरि राई।

C. उत्प्रेक्षा अलंकार (Utpreksha):

  • नियम: जहाँ उपमेय में उपमान की 'संभावना या कल्पना' की जाए।
  • UPTET जादुई ट्रिक: पंक्ति में मनु, मानो, जनु, जानो, जनहुँ, मनहुँ शब्द 100% आते हैं।
  • उदाहरण:
    • ​ले चला साथ मैं तुझे कनक, ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण।
    • ​सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात। मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप परयो प्रभात।

D. अतिशयोक्ति अलंकार (Atishayokti):

  • नियम: जहाँ किसी बात को बहुत ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर (Exaggerate करके) कहा जाए।
  • उदाहरण:
    • ​हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सगरी जल गई, गए निसाचर भाग। (पूँछ में आग लगने से पहले ही पूरी लंका जल गई— यह बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है)।

(शिक्षक साथियों! इन 2000 शब्दों के गहराई वाले नोट्स और ट्रिक्स को पढ़ने के बाद, अब असली UPTET परीक्षा का अनुभव लेने के लिए नीचे दिए गए 50 PYQ आधारित छोटे और सटीक विकल्पों वाले लाइव टेस्ट को हल करें!)




UPTET Hindi Advanced Quiz

वाच्य, समास एवं अलंकार (अध्याय 10)

SK SACHIN CLASSES | UPTET PYQ मॉक टेस्ट
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